अमेरिकी सेना के हथियारों में शामिल होगी 'खुखरी', देहरादून की इस दुकान को मिला बड़ा ऑर्डर

रानीखेत में भारतीय सेना के साथ युद्धाभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना को खुखरियां इस कदर भा गईं कि उन्होंने अपने लिए भी खुखरियों की डिमांड दे दी।
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देहरादून खुखरी: khukri has joined us army
Image: khukri has joined us army

: देवभूमि उत्तराखंड के वीर जवान ही नहीं यहां के बने हथियार भी पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। देहरादून की बनी खुखरी के करतब देखकर अमेरिकी सेना भी हैरान है, तभी तो अमेरिकी सेना ने देहरादून की सौ साल पुरानी दुकान को अपने लिए खुखरियां तैयार करने का बड़ा ऑर्डर दिया है। यानि अब तक जो देहरादून बासमती चावल और स्कूल एजुकेशन के लिए फेमस था, वो अब लोहे की उम्दा तलवारों और खुखरियों के लिए अपनी पहचान बना रहा है। हॉलीवुड की कई फिल्मों में दून में बनी तलवारें और लोहे के हेलमेट का इस्तेमाल किया जा चुका है, और अब यहां की खुखरियां अमेरिकी सेना के अफसरों की शान बढ़ाएंगी। यहाँ की 100 साल पुरानी खुखरी की दुकान को अमेरिकी सेना की ओर से वहां के अफसरों के लिए 60 खुखरियां तैयार करने का आर्डर मिला है। देहरादून के डाकरा बाजार स्थित सतीश खुखरी की दुकान को ये आर्डर मिला है। दून में बनी खुखरियों का इस्तेमाल खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सेना के अफसर करेंगे।

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दरअसल अमेरिकी सेना ने भारतीय खुखरी का कमाल उस वक्त देखा जब वो रानीखेत में भारतीय सेना के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही थी। इसी दौरान उन्होंने देखा की गोरखा रेजीमेंट के सैनिकों के पास जो खुखरी है, वो अमेरिकी सेना के चाकूओं से बेहतर है। बस फिर क्या था...सैनिकों की डिमांड पर उनके अफसर देहरादून पहुंचे और अपनी सेना के लिए खुखरियों का ऑर्डर दे दिया। बता दें कि युद्ध के दौरान खुखरी के इस्तेमाल का लंबा इतिहास रहा है। गोरखा सैनिकों के लिए खुखरी पारंपरिक हथियार है। इन खुखरियों के दम पर सैनिकों ने कई बार दुश्मनों को धूल चटाई तो कई बार ये खुखरियां ही उनकी जीवनरक्षक भी बनीं। भारतीय सेना के वीर गोरखा सैनिकों ने 1965 और 1971 के युद्ध में अपनी खुखरियों से दुश्मन के दांत खूब खट्टे किए थे। चलिए अब आपको ये भी बता देते हैं कि दून में वो खास दुकान है कहां जहां की बनी खुखरियों की मुरीद अमेरिकी सेना हो गई है। ये दुकान डाकरा बाजार में है, जिसे सतीश खुखरी की दुकान के नाम से जाना जाता है। दुकान में फ़िलहाल चौथी पीढ़ी खुखरियों का निर्माण कर रही है। ये दुकान इसलिए भी खास है क्योंकि यहीं से भारतीय सेना को भी खुखरियों की आपूर्ति की जाती हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना के एक अफसर ने खुद इस दुकान में आकर 60 खुखरियों का आर्डर दिया है। अमेरिकी सेना के अफसर को मशीन की बजाय हाथ से बनी खुखरियां ज्यादा पसंद आई हैं और उन्होंने भविष्य में खुखरियों का बड़ा ऑर्डर देने का वादा भी किया है।