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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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: प्रकाश पंत का असमय चले जाना देवभूमि के लिए एक आघात जैसा है। उनके लिए पूरा उत्तराखंड ही एक परिवार जैसा था..शांत और शालीन नेता की पहचान रखने वाले प्रकाश भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी यादें जीवित हैं। दिवंगत प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर विशेष विमान से देहरादून के बाद पिथौरागढ़ स्थित नैनी सैनी हवाई पट्टी पर पहुंचा। यहां से पार्थिव शरीर को वाहन से देव सिंह मैदान लाया गया। आखिरी विदाई में मौके पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। वास्तव में प्रकाश पंत एक जननेता रहे हैं और उनकी आखिरी विदाई में उमड़ा सैलाब इस बात का सबूत भी है। हर कोई आखिरी बार निगाह भरकर उन्हें देखना चाहता था। स्व. प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर पिथौरागढ़ के देवसिंह मैदान में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। यहां रामेश्वर घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। आगे देखिए तस्वीरें