देश के कई राष्ट्रीय संस्थान अब भी किराये के भवन में चल रहे हैं, डॉ. निशंक ने हाल ही में इनके हक में एक बड़ा फैसला सुनाया...
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कोमल नेगी
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Image: RAMESH POKHRIYAL NISHAK DICISSION ABOUT NIT IIM IIT
: हर साल देशभर के हजारों छात्र आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम में दाखिला लेते हैं। लाखों छात्र इन राष्ट्रीय संस्थानों में दाखिला पाने की उम्मीद में सालों साल तैयारी करते हैं, पर इनमें से कई राष्ट्रीय संस्थान ऐसे हैं, जिनके पास खुद का भवन तक नहीं है। श्रीनगर गढ़वाल में NIT वाला मुद्दा तो आपको याद ही होगा। इससे छात्रों को तमाम तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, साथ ही उनकी सुरक्षा भी खतरे में रहती है। अब ऐसा नहीं चलेगा। हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्री बने हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल ने ऐसे संस्थानों के हक में एक बड़ा फरमान सुनाया है। उन्होंने राज्य सरकारों से कहा है कि राष्ट्रीय संस्थानों को एक महीने के भीतर जमीन मुहैया कराई जाए। अगर एक महीने के भीतर जमीन नहीं दी गई तो इन राष्ट्रीय संस्थानों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे सबसे ज्यादा नुकसान संबंधित राज्य के छात्रों का ही होगा, क्योंकि एनआईटी में 50 फीसद सीट संबंधित राज्य के छात्रों के लिए रिजर्व रहती है। संस्थान शिफ्ट हुआ तो छात्रों का जो नुकसान होगा उसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।
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कुल मिलाकर अब राष्ट्रीय संस्थान किराये के भवन में नहीं चलेंगे। दरअसल पिछले हफ्ते मानव संसाधन मंत्री ने आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम के डायरेक्टर संग मीटिंग की थी। इस बैठक में 6 से ज्यादा संस्थानों के डायरेक्टर्स ने कहा कि उनके संस्थान के पास खुद का भवन नहीं है। कैंपस और हॉस्टल दूर होने की वजह से छात्रों को परेशानी होती है, उनकी सुरक्षा को भी खतरा है। केंद्रीय मंत्री निशंक ने उन्हें जल्द ही जमीन दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही दूसरी परेशानियां दूर करने की भी बात कही। आपको बता दें कि करीब 7 साल पहले देशभर में नए आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम बनाए गए थे। इनकी स्थापना तो कर दी गई, लेकिन भवन निर्माण के लिए अब तक जमीन नहीं मिली। राज्य सरकारों की लापरवाही की वजह से छात्र किराये के भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं। अब मानव संसाधन मंत्री ने ऐसे राज्यों को एक महीने का अल्टीमेटम दे दिया है। इसके साथ ही डॉ. निशंक ने देश के सभी राज्यों की स्टेट यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में शिक्षको के लाखों खाली पदों को जल्द भरने के भी निर्देश दिए। इस वक्त देशभर में स्टेट यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में 3 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं, जिस वजह से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए इन्हें जल्द भरने के निर्देश दिए गए।