विपिन के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं, एक वक्त था जब विपिन होटल में काम करते थे, पर आज वो सेना का हिस्सा बन गए हैं...
-
कोमल नेगी
-
Advertisement
90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
Image: Army man from remote village won gold medal
देहरादून: उत्तराखंड को देवभूमि ही नहीं वीर भूमि भी कहा जाता है। यहां हर घर में सेना का एक जवान जरूर मिलेगा। सेना में भर्ती होने के लिए यहां के युवा सालों साल मेहनत करते हैं, और जब सफलता मिलती है तो पूरे गांव का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। रुद्रप्रयाग के रहने वाले विपिन सिंह भी सेना में भर्ती हो गए हैं, अब आप सोचेंगे कि इसमें क्या नई बात है। हर साल सैकड़ों युवा सेना का हिस्सा बनते हैं, नई और खास बात है विपिन का वो संघर्ष, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया। रुद्रप्रयाग में एक गांव हे उरोली, विपिन इसी गांव के रहने वाले हैं। शनिवार को भवानीदत्त परेडग्राउंड में गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट सेंटर में जिन 159 नए जवानों ने शपथ ली, उनमें विपिन भी एक हैं।
यह भी पढ़ें - ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से जुड़ी अच्छी खबर, पूरा हुआ सबसे जरूरी काम..जानिए खास बातें
राइफलमैन विपिन को पूरे प्रशिक्षण के दौरान शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल मिला। गोल्ड मेडल हासिल करने वाला गांव का ये युवा पहले होटल में नौकरी करता था। विपिन का परिवार जखोली ब्लॉक में रहता है। पिता मोर सिंह राणा गांव में दिहाड़ी मजदूर हैं। मां रुक्मणी देवी घर घर संभालती हैं। पहाड़ में नौकरी के अवसर बेहद सीमित हैं। यही वजह है कि इंटर करने के बाद विपिन गांव छोड़कर होटल में काम करने लगे। पर पहाड़ से बाहर मन नहीं लगा, फिर सेना में भर्ती होने की ठानी। गांव लौटे और प्रशिक्षण लेने लगे। मेहनत रंग लाई और शनिवार को विपिन विधिवत तौर पर सेना का हिस्सा बन गए। अपनी मेहनत के दम पर विपिन ने ना सिर्फ सेना में नियुक्ति हासिल की, बल्कि शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल भी जीता। सफलता छोटी या बड़ी नहीं होती, सफलता बस सफलता होती है, पहाड़ के इस जुझारू युवा को राज्य समीक्षा टीम की तरफ से बधाई। आप भी विपिन को बधाई देकर उसका हौसला बढ़ाएं।