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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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टिहरी गढ़वाल: टिहरी झील ने कम वक्त में ही पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग जगह बना ली है। झील निर्माण के लिए पुराने टिहरी को अपना बलिदान देना पड़ा। लोगों को नई टिहरी में बसाया गया, पर लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुईं। टिहरी झील निर्माण के बाद प्रतापनगर और उत्तरकाशी जिले के कई इलाके अलग-थलग पड़ गए। संचार साधनों का तो उत्तराखंड में वैसे ही बुरा हाल है। इन इलाकों के लोग कई साल से टिहरी झील पर पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। लाखों लोगों की ये मुराद जल्द ही पूरी होने वाली है। डोबरा चांठी पुल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। अभी पुल पर पेंटिंग का काम बाकी है, मार्च 2020 से इस पर यातायात शुरू होगा, प्रतापनगर की जनता का सपना सच होगा।चलिए अब आपको इस पुल की खास बात बताते हैं। टिहरी झील पर बन रहे इस पुल की लंबाई 440 मीटर है, ये एशिया का सबसे लंबा पुल है। पुल बनने से क्षेत्र में बसी ढाई लाख आबादी को फायदा होगा।