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उत्तरकाशी: पहाड़ में सड़कों का हाल किसी से छिपा नहीं है। गांवों में हर साल सड़क बनती है, लेकिन ये सड़कें एक साल भी पूरा नहीं कर पातीं और पहली बरसात में ही बह जाती हैं। सड़क निर्माण में खामियों की खबरें तो आती हैं, पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कम ही होती है। उत्तरकाशी के डुंडा विकासखंड में भी ऐसा ही हो रहा था। उदालका गांव में बन रही सड़क में कई खामियां थी। डीएम ने सड़क निर्माण में खामियां पकड़ी और लगे हाथ जांच के निर्देश भी दे दिए। मैजरमेंट बुक यानी एमबी में सड़क की माप कुछ और दर्शायी गई थी, जबकि धरातल पर बन रही सड़क का माप कुछ और ही निकला। उदालका गांव में बनने वाली ये सड़क मेरा गांव, मेरी सड़क योजना के तहत बन रही है। सड़क ब्लॉक कार्यालय इस सड़क को मनरेगा के तहत बना रहा है। लागत है 30 लाख रुपये। हाल ही में जब डीएम डॉ. आशीष चौहान ने सड़क का निरीक्षण किया तो उन्हें कई खामियां दिखीं। तीस लाख की लागत से बन रही सड़क की लंबाई एमबी में 450 मीटर थी, जबकि नापने पर ये सिर्फ 315 मीटर निकली। सड़क की चौड़ाई में भी अंतर दिखा। साढ़े तीन से लेकर चार मीटर सीसी के सापेक्ष तीन मीटर तक ही सीसी ब्लॉक मिला। शुक्र है कि डीएम ने ये लापरवाही पकड़ ली और सड़क से संबंधित सभी दस्तावेज सील कर दिए। डीएम ने एक जांच टीम भी बनाई है, जिसे एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। डीएम आशीष चौहान ने कहा कि भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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