अल्मोड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां कोसी नदी के जल में नहाने से दूर होती हैं बीमारियां

सोमेश्वर में स्थित दिरोड़ी माता के प्राचीन मंदिर में गुफा के मुहाने से लगातार जल बहता रहता है, लोग इस जल को चमत्कारी मानते हैं...
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पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।

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Kosi river: Kosi river holy water cure skin diseases
Image: Kosi river holy water cure skin diseases

अल्मोड़ा: उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां की जड़ी-बूटियों ही नहीं, बल्कि गंगा में मिलने वाले पत्थरों को भी चमत्कारी माना जाता है। यहां की पवित्र नदियों में लोगों की गहरी आस्था है, इन नदियों से जुड़ी चमत्कार की कहानियां दूर-दूर तक मशहूर हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है अल्मोड़ा के सोमेश्वर से। जहां रनमन कस्बे में हाईवे और कोसी नदी के किनारे दिरोड़ी माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर की गुफा के मुहाने से लगातार जल बहता रहता है। इस जल को श्रद्धालु बेहद चमत्कारी मानते हैं। ग्रामीणों की आस्था है कि कोसी नदी के इस पवित्र जल में स्नान करने से हर तरह के त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं। जो लोग महंगा इलाज करा-करा के थक जाते हैं, उन्हें इस चमत्कारी जल में स्नान करने से त्वचा संबंधी बीमारी से मुक्ति मिल जाती है।

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पवित्र जल में स्नान करने के लिए लोग दूर-दूर से सोमेश्वर पहुंचते हैं। बुधवार को यहां स्थित दिरोड़ी माता मंदिर में माता वैष्णो देवी की प्रतिमा स्थापित की गई। मंदिर में पहले से स्थापित प्रतिमा खंडित हो गई थी। प्रतिमा स्थापना के मौके पर भवरी और रनमन गांव की महिलाओं ने भव्य कलश यात्रा भी निकाली। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। मान्यता है कि कोसी नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में माता वैष्णों देवी का वास है। श्रद्धालु तो यहां तक कहते हैं कि मंदिर की ये गुफा सीधे हरिद्वार तक पहुंचती है। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। यहां बह रहे जल में स्नान करने से हर तरह के चर्म रोगों से छुटकारा मिल जाता है।