गरीब बूढ़ी महिला की मदद के लिए आईएएस किंजल ने जो किया वो वाकई काबिले तारीफ है, इनकी कहानी आपको भी प्रेरणा देगी...
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komal
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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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Image: Inspiring story of ias kinjal singh
: अच्छा लगता है, जब ऊंचे ओहदों पर काम करने लोग निचले तबके की मदद के लिए आगे आते हैं। उनके सुख-दुख को अपना समझते हैं, उनके दर्द को दूर करने की कोशिश करते हैं। उत्तराखंड में भी ऐसे कई आईएएस अफसर हैं, जिनके कामों की तारीफ होती है, वो युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं। इन्हीं युवा अफसरों में से एक हैं आईएएस किंजल सिंह, जो कि उत्तर प्रदेश में सेवाएं दे रही हैं। कुछ समय पहले की बात है। आईएएस किंजल सिंह उस वक्त फैजाबाद, जो कि अब अयोध्या है की डीएम थीं। एक दिन किंजल अपने काफिले के साथ एक मस्जिद का इंस्पेक्शन कर लौट रही थीं। रास्ते में उनकी नजर एक बुजुर्ग महिला पर पड़ी। बुजुर्ग महिला मूना करेले बेच रही थी। किंजल ने मूना से करेले का दाम पूछा तो महिला ने 50 रुपये प्रति किलो बताया। किंजल ने एक किलो करेले खरीदे, लेकिन उसकी कीमत 50 रुपये की बजाय 1550 रुपये देकर चुकाई।
बुजुर्ग महिला बेहद गरीब थी। उसकी मदद करने के लिए डीएम किंजल सिंह देर रात अफसरों के साथ महिला के झोपड़े पर गईं और महिला के घर 40 किलो चावल, 5 किलो दाल, 50 किलो गेहूं और 20 किलो आटा पहुंचाने के निर्देश दिए। आधे घंटे के भीतर सारा सामान बुजुर्ग महिला के घर पहुंच गया। डीएम के कहने पर मूना को उज्जवला स्कीम के तहत चूल्हा-सिलेंडर, टेबल फैन, सोने के लिए तख्त, दो साड़ी और चप्पल भी दी गई। 75 साल की मूना और उसकी नातिन की परेशानी को देखते हुए उन्हें सरकारी मकान और हैंडपंप भी मुहैया कराया गया। आज हम किंजल की सफलता देख रहे हैं, पर इस सफलता के पीछे उनका कड़ा संघर्ष छिपा है। किंजल सिंह 2008 में आईएएस बनी थीं। वो 6 महीने की थीं, जब उनके डीएसपी पिता की फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी। कुछ समय बाद मां भी कैंसर से चल बसी। कोई और होता तो टूट जाता पर किंजल ने हिम्मत नहीं हारी। खुद को और अपनी छोटी बहन प्रांजल को संभाला। साल 2008 में किंजल आईएएस तो प्रांजल आईपीएस बनीं। दोनों बहनों ने पिता की हत्या का केस लंबे वक्त तक लड़ा और हत्यारों को सजा दिलाई। साहस की यही कहानियां लाखों लोगों को कभी हार ना मानने और मुश्किलों पर जीत हासिल करने का हौसला देती हैं। किंजल सिंह अब उत्तर प्रदेश में विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा पद की जिम्मेदारी निभा रही हैं।