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केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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चम्पावत: मुझे तो़ड़ लेना वनमाली, उस पथ पर तुम देना फेंक...मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ पर जाएं वीर अनेक। माखनलाल चतुर्वेदी की ये कविता मानों आज फिर से सार्थक हो गई है। एक बार फिर से उत्तराखंड का एक वीर सपूत मातृभूमि की बलिवेदी पर चढ़ गया। पहाड़ में शोक की लहर है लेकिन गर्व के साथ हर किसी को मस्तक उठा है। उत्तराखंड के चंपावत जिले के जांबाज जवान राहुल रैंसवाल अवंतीपोरा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए। रियासी बमन गांव के रहने वाले राहुल अभी सिर्फ 25 साल के थे। 25 साल की उम्र क्या होती है? एक मां ही जान सकती है 25 साल के बच्चे को खोने का दर्द, वो पिता ही जान सकते हैं अपने जवान बेटे को खोने का दर्द...उन मां-पिता ने भी अपने बेटे के लिए कई ख्वाब पाले थे। इन सबके बीच राहुल की पत्नी सन्न हैं। अभी शादी को कुछ वक्त हुआ था कि पति देश के लिए शहीद हो गए।