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केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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पिथौरागढ़: उत्तराखंड के हर क्षेत्र में अलग बोली-भाषा और संस्कृति के दर्शन होते हैं। किसी एक राज्य में अलग-अलग परंपराओं के दर्शन करने हों तो उत्तराखंड से बेहतर कोई जगह नहीं। बदलते वक्त के साथ पुराने रिवाजों पर आधुनिकता का रंग चढ़ने लगा है, लेकिन फिर भी पहाड़ के दूरस्थ गांव आज भी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने की जद्दोजहद में जुटे हैं। एक ऐसी ही परंपरा को बचाने का प्रयास पिथौरागढ़ के गरुड़ में हो रहा है। जहां क्षेत्र के भेटा गांव में निमंत्रण देने के लिए अनोखी परंपरा निभाई जाती है। गांव-परिवार में शुभ कार्य होने पर गांव की सुहागिन महिलाएं अपने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर सगे संबंधियों और ग्रामीणों को निमंत्रण देने जाती हैं। उनके घरों के आगे स्वास्तिक का चिह्न बनाती हैं। ये परंपरा सालों से निभाई जा रही है, जो कि रिश्तों में समरसता का आधार है।