IMA Passing Out Parade 2026 में 515 युवा कैडेट्स भारतीय सेना और मित्र देशों की सेनाओं में अधिकारी बने। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में देहरादून में आयोजित परेड में पहली बार 9 महिला अधिकारी भी सेना में शामिल हुईं।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
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Image: Dehradun IMA Passing Out Parade 2026
देहरादून: "भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में शनिवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के साथ देश को 515 नए सैन्य अधिकारी मिल गए।" वर्षों की कठिन ट्रेनिंग और अनुशासन की कसौटी पर खरे उतरे युवा कैडेट्स ने ‘अंतिम पग’ पार कर भारतीय सेना और मित्र देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में अपना गौरवपूर्ण सफर शुरू किया।
Dehradun IMA Passing Out Parade 2026
आईएमए के ऐतिहासिक चेटवुड ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित पासिंग आउट परेड में भारत की राष्ट्रपति एवं सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। सुबह 6:40 बजे शुरू हुई परेड में अनुशासन, समर्पण और सैन्य परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कदमताल करते कैडेट्स ने यह संदेश दिया कि वे देश की सुरक्षा, सम्मान और अखंडता के लिए हर परिस्थिति में अपना सर्वोच्च बलिदान देने को तैयार हैं।
‘अंतिम पग’ ने बदली जिंदगी, परिवारों की आंखें हुईं नम
परेड का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब कैडेट्स ने ‘अंतिम पग’ पार किया। यह वह ऐतिहासिक पल था, जो एक प्रशिक्षु कैडेट को भारतीय सेना के अधिकारी में बदल देता है। जैसे ही कैडेट्स ने अंतिम पग पार किया, पूरे परिसर में तालियों की गूंज सुनाई दी। दर्शक दीर्घा में मौजूद अभिभावकों और परिजनों की आंखें गर्व और खुशी के आंसुओं से भर उठीं। वर्षों की मेहनत और सपनों की मंजिल आखिरकार पूरी हो चुकी थी। आगे पढ़िए..
पुष्पवर्षा और फ्लाईपास्ट ने बढ़ाया रोमांच
समारोह के दौरान हेलिकॉप्टरों से कैडेट्स पर पुष्पवर्षा की गई। इसके साथ ही भारतीय तिरंगा, भारतीय सेना का ध्वज और आईएमए का ध्वज लेकर हेलिकॉप्टरों ने भव्य फ्लाईपास्ट किया। आसमान में लहराते तिरंगे और जमीन पर कदमताल करते युवा अफसरों का दृश्य पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया। हर आंख तिरंगे पर टिकी थी और हर दिल गर्व से भर उठा था।
पहली बार नौ महिला सैन्य अधिकारी बनीं सेना का हिस्सा
158वीं पासिंग आउट परेड ने एक नया इतिहास भी रचा। पहली बार आईएमए से प्रशिक्षित नौ महिला सैन्य अधिकारी भारतीय सेना में शामिल हुईं। यह उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्त भूमिका का प्रतीक मानी जा रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि आईएमए केवल सैनिक तैयार नहीं करता, बल्कि ऐसे नेतृत्वकर्ता तैयार करता है जो साहस, करुणा, दया और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण होते हैं। इस बार पासिंग आउट परेड में कुल 515 कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें 481 भारतीय कैडेट्स और 16 मित्र देशों के 34 कैडेट्स शामिल रहे। परेड के बाद आयोजित ‘पीपिंग सेरेमनी’ में नव नियुक्त अधिकारियों के कंधों पर सितारे सजाए गए और उन्हें औपचारिक रूप से अधिकारी का दर्जा प्रदान किया गया।
स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित हुए विशाल कुमार
समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया गया। प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ कैडेट विशाल कुमार को प्रदान किया गया। इसके अलावा विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अन्य कैडेट्स को भी पुरस्कार दिए गए।
आईएमए की यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य आयोजन नहीं थी, बल्कि राष्ट्रसेवा, त्याग, अनुशासन और समर्पण की उस भावना का उत्सव थी जो हर भारतीय सैनिक के हृदय में बसती है। देहरादून की इस ऐतिहासिक परेड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करने को सदैव तैयार हैं।