देहरादून में पुलिस क्या कर रही है ? ये खबर जानकर आपके दिल में कई सवाल कौंधेंगे।
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देहरादून: Dehradun prem nagar man beaten case
Image: Dehradun prem nagar man beaten case

देहरादून: मामला देहरादून के प्रेमनगर थाने का है। थाने के थानेदार ने एक युवक को ख़बर लिखने तक सुबह से थाने में बिठा रखा है। अब पूरा मामला समझिए ...युवक का नाम सुनील ढौंढियाल है। सुनील ढौंढियाल ने एक स्थानीय साहूकार महिला से कुछ रूपया ब्याज पर लिया था। जिसका वो मूलधन और ब्याज चुकाता रहा । रकम 20 हजार रुपये बताई जाती है, जिसमें से युवक 16 हजार रुपये दे चुका है। युवक का आरोप है कि रात को साहूकार महिला ने फोन पर बकाया रकम की मांग की और साथ में धमकी दी कि अगर रुपया नहीं लौटाया तो जान से मार देंगे। युवक ने ये भी आरोप लगाया कि साहूकार महिला ने गाली-गलौच भी की। इस पर युवक ने भी फोन पर गाली-गलौच की। आज सुबह साहूकार महिला कुछ गुंडों को लेकर युवक के घर पर आ धमकी और उससे मारपीट भी कर डाली। उल्टा पुलिस को सूचित कर उसे थाने भी ले गए। युवक का आरोप है कि पुलिस ने उसकी एक न सुनी और साहूकर औरत के ही पक्ष में काम करने लगी। युवक थानेदार से बार बार गुजारिश करता रहा कि उसका मेडिकल करा लिया जाए, उसको बुरी तरह पीटा गया है और उसकी तहरीर भी लिख ली जाए। लेकिन थानेदार ने युवक को सुबह से शाम तक ...यहां तक कि खबर लिखे जाने तक थाने में बिठाकर रखा और बार बार दबाव बनाया कि वो पैसा आज ही लौटाए। थानेदार ने साहूकार महिला से गाली गलौच करने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की भी धमकी दी और कहा कि ‘तुम्हें जेल भेजेंगे।

अगर ये पूरा मामला सच है तो देहरादून पुलिस कठघरे में खड़ी होती है। पुलिस आखिर किसी साहूकार का गैर कानूनी पक्ष कैसे ले सकती है? जिस युवक को साहूकार और उसके गुंडों ने पीटा हो, उसको दून पुलिस का थानेदार सुबह से लेकर शाम तक थाने में कैसे बिठाकर रख सकता है? अगर पुलिस को गाली गलौच के मामले में ही एफआईआर दर्ज करनी थी तो ऐसा करके युवक को जेल क्यों नहीं भेज दिया गया, अगर ये कानून प्रद था? युवक के साथ मारपीट हुई थी और उसके सिर पर मारपीट के निशान पाए गए। तब भी उसकी तहरीर क्यों नहीं लिखी गई और उसका मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया? क्या दून पुलिस ने पीड़ित को ही दोषी ठहराने की तरफ कदम नहीं उठाया?