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बागेश्वर: एक वक्त था जब पहाड़ की बेटियों की जिंदगी खेत, गांव और घर के आंगन तक सिमटी रहती थी। जिंदगी संघर्ष से भरी थी, लेकिन इसके बावजूद घर-परिवार में उनके योगदान को ना तो अहमियत मिलती थी और ना ही सराहना। पर अब वक्त बदल गया है, बेटियां घर-परिवार के साथ-साथ अपने करियर को भी तरजीह देने लगी हैं। बागेश्वर में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जहां बिटिया ने शादी से पहले वन आरक्षी की परीक्षा दी। पेपर देकर लौटने के बाद उसने शादी का जोड़ा पहना और अपने जीवनसाथी संग सात फेरे लिए। इस बिटिया का नाम आशा है, जो कि नदीगांव में रहती है। रविवार को खोली गांव के रहने वाले प्रकाश और आशा की शादी थी। शादी के दिन ही आशा का वन आरक्षी का पेपर भी था। आशा के लिए दोनों महत्वपूर्ण थे। परिवारवाले आशा की शादी की तैयारी में जुटे थे, जबकि वो लिखित परीक्षा की तैयारी कर रही थी। घरवालों ने आशा से कहा कि वो पेपर छोड़ दे, लेकिन आशा नहीं मानी। रविवार को उसने बारात की तैयारी छोड़ी और सुबह साढ़े नौ बजे वन आरक्षी का पेपर देने सेंटर पहुंच गई। लिखित परीक्षा दोपहर एक बजे थी। बारात घर पहुंची तो बारातियों को पता चला कि दुल्हन पेपर देने गई हुई है। खैर किसी तरह आशा पेपर देने के बाद तुरंत घर पहुंची और दुल्हन का जोड़ा पहन लिया। इस बीच बारात को करीब आधा घंटा इंतजार करना पड़ा। आखिर में शादी विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गई। कुल मिलाकर आशा ने खुद से किया वादा भी निभाया और साथ ही परिवार की लाज भी रख ली। दोनों परीक्षाओं में वो सफल रही, अब उसे उम्मीद है कि परिवार के सहयोग से वो वन आरक्षी और जीवन की दूसरी परिक्षाओं में भी सफल रहेगी। गांव भर में आशा के फैसले की खूब तारीफ हो रही है।
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