पहाड़ में 9 साल के बच्चे की आंत फटी, लॉकडाउन के बीच डॉक्टर बने देवदूत..फ्री में किया इलाज

आर्थिक रूप से कमजोर दिपांशु के पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और दिपांशु ने बीते साल अपनी मां को भी खो दिया। इसी के चलते कोरोनेशन अस्पताल के डॉक्टर्स ने दिपांशु का मुफ्त में इलाज करने का निर्णय लिया और मानवता की मिसाल पेश की।
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Uttarakhand Lockdown: Coronation hospital doctors save a child in lockdown
Image: Coronation hospital doctors save a child in lockdown

उत्तरकाशी: वैश्विक महामारी कोरोना के बीच से एक ऐसी खबर आ रही है जो आपके दिल को सुकून पहुंचाएगी। उत्तरकाशी के कोरोनेशन अस्पताल के डॉक्टर्स ने साबित कर दिया है कि चिकित्सक वाकई धरती पर ईश्वर का साक्षात रूप हैं। देवभूमि के डॉक्टर्स ने ऐसी मिसाल समाज के आगे पेश की है जो दिखाती है कि इंसान ही इंसान के काम आता है। तमाम नफरतों, द्वेष और ईर्ष्या के बीच उत्तरकाशी में प्रेम और मनुष्यता ने एक बार फिर से अपना परचम ऊंचा कर दिया है। उत्तरकाशी के निवासी और बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीपांशु का अपेंडिक्स गल गया था जिसकी वजह से उसकी आंत फट गयी। दीपांशु के पिता मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। बहुत ही गम्भीर हालत में दीपांशु को अस्पताल लेकर जाया गया। आगे पढ़िए..

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कोरोनेशन अस्पताल के डॉक्टर्स ने दीपांशु के गरीब पिता से एक भी रुपया न लेकर सारा खर्चा आपस में बांट दिया और दिपांशु का सक्सेफुल ऑपरेशन किया। एक बिन मां के छोटे से बच्चे की जान बचा कर उसको नया जीवन दान देने वाले इन जिंदादिल डॉक्टर्स की आज हर कोई सराहना कर रहा है। आइये आपको पूरे मामले से अवगत कराते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी के नौगांव में स्थित बुरसी गांव का निवासी 9 वर्षीय दिपांशु बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। दिपांशु की मां का बीते साल निधन हो गया था। बिन मां के दिपांशु के पिता मजदूरी करते हैं और अपने बूढ़े पिता और बच्चे का पेट पालते हैं। दिपांशु के पिता की सुनने की क्षमता बेहद कम है। परिवार की आर्थिक परिस्थिति खराब होने की वजह से वह बड़ी ही मुश्किल से घर चला पाते हैं। हाल ही में दिपांशु के अपेंडिक्स गल जाने के कारण उसकी आंत फट गई जिसके बाद उसे नौगांव ब्लॉक के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। मगर उसकी हालत गम्भीर होने के बाद उसके दादा और पिता उसे शनिवार को कोरोनेशन अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बताया। आगे पढ़िए..

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ऐसे में सभी डॉक्टर्स द्वारा यह तय हुआ कि दिपांशु के पिता से इलाज के लिए एक भी रुपया नहीं लेंगे। उन्होंने सारा खर्चा आपस में बांट लिया और दिपांशु का ऑपरेशन किया जो कि कामयाब हुआ है। दिपांशु अब बिल्कुल ठीक है और 10 दिन के लिए अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। कोरोनेशन अस्पताल के सर्जन डॉक्टर आरके टम्टा बताते हैं कि दिपांशु का अपेंडिक्स गल गया था जिस वजह से उसकी आंत फट गई थी। ऐसी परिस्थिति में पेट दर्द होना शुरू हो जाता है और उल्टी आने लगती है। कोरोनेशन के डॉक्टर्स की बदौलत दिपांशु का ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। कोरोनेशन के डॉक्टर्स ने दिपांशु को दूसरा जीवन दान दिया जिसके बाद दिपांशु के पिता ने उनका दिल से धन्यवाद दिया। आज उत्तराखंड के इन डॉक्टर्स ने इंसानियत की बड़ी मिसाल पेश की है और उनके इस नेक काम को बहुत लोगों द्वारा सराहा जा रहा है।