उत्तराखंड: डीएम ने हर गांव के नाम लिखी गढ़वाली में चिट्ठी, कहा-अब सावधानी बरतें

उत्तरकाशी के डीएम आशीष चौहान (IAS ashish chauhan ) ने उत्तरकाशी के ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने जिले में प्रवासियों के गांव लौटने के बाद उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निबटने की बात कही है।
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IAS Ashish Chauhan: IAS ashish chauhan letter to gram pradhans in garhwali
Image: IAS ashish chauhan letter to gram pradhans in garhwali

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आशीष चौहान (IAS ashish chauhan) ने ठेठ गढ़वाली भाषा में गांव के प्रधानों को पत्र लिख कर अपील की है। इस पत्र की खासियत है कि यह अंग्रेजी या हिंदी में न होकर उत्तराखंड की ठेठ गढ़वाली बोली में लिखा गया है। इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनता के नाम गढ़वाली बोली में पत्र लिखा था। यह तो आप जानते ही होंगे कि उत्तराखंड के अधिकांश जिले ग्रीन जोन घोषित हो चुके हैं जिनमें से एक उत्तरकाशी भी है। मगर समस्या अभी टली नहीं है। बता दें कि उत्तराखंड की सरकार लोगों की घर वापसी के अभियान में जुटी हुई है। सैंकड़ों प्रवासी बाहरी राज्यों से उत्तराखंड वापस आ रहे हैं। उत्तरकाशी के जिला प्रशासन ने भी यह अनुमान लगाया है कि उत्तरकाशी जनपद के 4000 से ज्यादा प्रवासी वापस जनपद और गांव की ओर रुख करेंगे। ऐसी परिस्थिति में अगर सावधानी नहीं बरती गई तो यह सम्भव है कि उत्तरकाशी में कोरोना का खतरा फिर से बढ़ जाए। आगे पढ़िए...

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ऐसे में उत्तरकाशी के डीएम आशीष चौहान (IAS ashish chauhan) ने ग्रामप्रधानों के नाम गढ़वाली बोली में पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने अपील करी है कि प्रवासियों के गांव वापस लौटने के बाद सभी गांव के प्रधान उनको क्वारंटाइन करने में प्रशासन का सहयोग करें। पत्र में डीएम ने यह भी लिखा कि भले ही आने वाले प्रवासियों की स्वास्थ्य जांच हो गई है मगर फिर भी रिस्क न लेते हुए उनको 14 दिन के लिए क्वारंटाइन करने में प्रशासन करने की मदद करें। अगर उत्तरकाशी को कोरोना से बचाना है तो प्रवासियों को 14 दिन के लिए ग्रामीणों से दूर क्वारंटाइन रहना पड़ेगा। गांव में लौटने वाले प्रवासियों को 14 दिनों तक गांव के सरकारी स्कूलों और पंचायत भवन में रूकवाने की व्यवस्था करने की भी अपील है। उन्होंने अपने पत्र में ग्राम प्रधानों से यह भी अपील करी है कि सरकारी स्कूलों और पंचायत भवन में क्वारंटाइन हुए लोगों के ऊपर कड़ी निगरानी रखने के लिए आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और गांव के शिक्षक को तैयार रखें। गांव में स्वास्थ्य जांच की भी पूरी व्यवस्था हो इस बात का भी ग्राम प्रधान पूरी तरह से ध्यान रखें। डीएम ने पत्र के माध्यम चेतावनी दी कि अगर किसी गांव में बाहर से आने वाले प्रवासियों को क्वारंटाइन नहीं किया गया या नियमों का उल्लंघन किया तो उस गांव के प्रधान के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाएगी।