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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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पौड़ी गढ़वाल: क्वारंटाइन को मजबूरी या जेल समझने वाले लोगों के लिए पौड़ी गढ़वाल के निवासी नेगी परिवार ने समाज के आगे जीती-जागती मिसाल पेश की है। ये तो हम सब जानते ही हैं कि कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन ने जन-जीवन को समेट कर रखा है। ऐसे में जरूरत है एक पॉजिटिव नजरिये को अपनाने की। देखा जाए तो लॉकडाउन और क्वारंटाइन की अवधि का पहाड़ के लोग काफी सदुपयोग करते दिख रहे हैं। सड़क बनाने से लेकर क्वारंटाइन सेंटर में पेंट करने तक ....पहाड़ के हुनरमंद हर जगह अपना हुनर दिखा ही देते हैं। ऐसा ही कुछ पौड़ी गढ़वाल के नेगी परिवार ने कर दिखाया है। क्वारंटाइन में रहते हुए उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के खिर्सू ब्लॉक के असिंगी गांव में सरोज नेगी और उनकी धर्मपत्नी ने महज कुछ ही दिनों में मिल कर अपने गांव के बेजान पड़े प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर ही बदल डाली। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हुआ। यह तो आप जानते ही होंगे कि उत्तराखंड के गांव में लौट रहे प्रवासियों को 14 दिन के लिए होम क्वारंटाइन किया जा रहा है। पौड़ी गढ़वाल के खिर्सू ब्लॉक के असिंगी गांव में सरोज नेगी भी अपनी पत्नी कामिनी नेगी और बच्चों संग शहर से वापस लौटे। नियमानुसार उनको गांव में क्वारंटाइन होना पड़ा।