गढ़वाल का अनुज बिष्ट...शहर की नौकरी छोड़ गांव लौटा..अब मुर्गी पालन से शानदार कमाई

रिवर्स पलायन का रास्ता चुन स्वरोजगार को अपना कर गांव में ही मुर्गी फार्म खोल कारोबार कर रहे हैं पौड़ी गढ़वाल में स्थित डांग गांव के निवासी अनुज बिष्ट। देशी मुर्गी पालन से वह वर्तमान में 50 से 60 हजार प्रतिमाह कमा रहे हैं।
Advertisement Best Hidden Treks in Kedar Himalaya for True Mountain Lovers

A chance to reconnect with nature and inner peace. Treks in Kedar Himalaya that stay with you for a lifetime.

Example Ads Media
Pauri Garhwal Anuj Bisht: Story of anuj bisht pauri garhwal
Image: Story of anuj bisht pauri garhwal

पौड़ी गढ़वाल: रिवर्स माइग्रेशन आज के समय में कितना ज़रूरी है यह तो हम सबको पता ही है। पहाड़ों की असली दुविधा ही पलायन है। युवा काम की तलाश में गांव छोड़कर बाहर शहरों में जाते हैं और घुट-घुट कर जीते हैं। ऐसे में स्वरोजगार की महत्ता का भी पता लगता है। कई युवा डरते हैं कि गांवों में व्यवसाय करने से उनको कोई फायदा नहीं होगा, उतना पैसा नहीं मिलेगा। मगर यह बात पूर्णतः गलत है। अगर आपके अंदर कुछ पाने की इच्छा है तो आप उस चीज को प्राप्त कर ही लेते हैं। कई युवा इस मिथ को तोड़ते हुए आगे आ रहे हैं और गांव की ओर रिवर्स माइग्रेशन कर स्वरोजगार को अपना रहे हैं। आज ऐसे ही एक युवक की कहानी राज्य समीक्षा आप सभी के समक्ष लेकर आया है जो शहर की ऐशोआराम भरी जिंदगी छोड़ कर गांव वापस लौटा और अपना व्यवसाय शुरू किया जिससे प्रतिमाह वह लगभग 60 हजार तक कमा लेते हैं। पौड़ी मुख्यालय के पौड़ी-कोटद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर तकरीबन 16 किलोमीटर दूर पर स्थित डांग गांव है। इसी गांव के निवासी हैं अनुज बिष्ट। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रह चुके अनुज बिष्ट शहर के निजी कंपनी में इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे। मगर उनको गांव आकर कुछ अलग करने का जुनून था। रिवर्स पलायन का रास्ता चुनकर वह गांव लौट कर आए और उन्होंने मुर्गी पालन का कार्य शुरू किया।

यह भी पढ़ें - Coronavirus: उत्तराखंड का 1 जिला रेड जोन..1 जिला ग्रीन जोन..11 जिले ऑरेंज जोन घोषित
अक्सर लोग फल या सब्जियों की खेती से ही शुरुआत करना पसंद करते हैं मगर अनुज बिष्ट ने कुछ हटकर करने की सोची। शुरुआत में 4 लाख तक कि इन्वेस्टमेंट के बाद उन्होंने पोल्ट्री फार्म खोला। सफेद मुर्गियों की जगह उन्होंने देशी मुर्गियों का पोल्ट्री फार्म खोला क्योंकि इन मुर्गियों के पालन-पोषण में अधिक ध्यान नहीं देना पड़ता। यह आम चारे पर भी जीवित रह जाती हैं वहीं सफेद मुर्गियों के लिए बाहर से गैर ऑर्गेनिक फीड मंगवाना पड़ता है। उन्होंने शुरुआत में 2000 चूजे मंगवाए। अभी उनके पास तकरीबन 1200 से 1300 मुर्गियां उपलब्ध हैं। इस बीच उन्होंने कई मुर्गियां बेची हैं। साथ ही उनके हजारों देशी अंडे भी बिके हैं। कहने को सफेद मुर्गी की कीमत बाजार में 200 से 300 रुपए की है वहीं देशी मुर्गी की कीमत उससे चौगुनी है। मगर तब भी अनुज बिष्ट ने रिस्क लिया और हिम्मत नहीं हारी। आज उनकी देशी मुर्गियों की सप्लाई स्थानीय जगहों के साथ-साथ देहरादून, पौड़ी और कोटद्वार में भी होती है। इसके साथ ही उनके महीने की कमाई लगभग 50 से 60 हजार तक हो जाती है जो कि किसी भी निजी कंपनी से कहीं बेहतर है। अनुज बिष्ट अपने नौकरी छोड़ कर गांव वापस आने के निर्णय से बेहद सन्तुष्ट हैं। उनकी तरह ही अगर और युवा स्वरोजगार की तरफ अग्रसर होंगे तो पलायन की समस्या खुद ब खुद रुक जाएगी और पहाड़ एक बार फिर से खुशहाल हो जाएंगे।
8218158802 इस नंबर पर आप अनुज बिष्ट से संपर्क कर सकते हैं