उत्तराखंड में 8 मरीज कोरोना पॉजिटिव..सभी एक ही सब्जी मंडी से..1100 के पार आंकड़ा

देहरादून सब्जी मंडी में 8 नए मरीज कोरोनावायरस संक्रमित (dehradun niranjanpur sabzi mandi Coronavirus) पाए गए हैं। ये खतरा बहुत बड़ा है।
Advertisement चारधाम यात्रा 2026 पैकेज बुकिंग शुरू! ये ऑफर मिस किया तो पछताओगे

चारधाम यात्रा 2026 का सबसे सस्ता पैकेज? कीमत जानकर चौंक जाएंगे!

Example Ads Media
dehradun niranjanpur sabzi mandi Coronavirus: dehradun niranjanpur sabzi mandi Coronavirus positive in
Image: dehradun niranjanpur sabzi mandi Coronavirus positive in

देहरादून: उत्तराखंड में इस वक्त की एक बड़ी खबर शाम में आ रही है। देहरादून सब्जी मंडी में 8 नए मरीज कोरोनावायरस संक्रमित पाए गए हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड में कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 1100 के पार चला गया है। आपको बता दें कि देहरादून निरंजनपुर सब्जी मंडी कंटेनमेंट जोन है। यहां से लगातार कोरोनावायरस संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं।देहरादून की निरंजपुर सब्जी मंडी पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चाओं में है। यहां एक के बाद एक कई आढ़ती और उनके परिजन कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है। मंडी को फिलहाल बंद करने की कोई योजना नहीं है, इसलिए यहां से संक्रमण दूसरे इलाकों में फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है। निरंजनपुर सब्जी मंडी के तीन ब्लॉक में कई लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। कोरोना संक्रमण के कई केस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिंग का काम शुरू तो किया, लेकिन दो दिन बाद ही सैंपलिंग रोक दी गई।

यह भी पढ़ें - Coronavirus: देहरादून पर बड़ा खतरा, हाई रिस्क ज़ोन में बड़ी लापरवाही
हाई रिस्क एरिया होने के बावजूद यहां ना तो सैंपलिंग का काम हो रहा है, और ना ही मंडी को बंद करने के कदम उठाए गए हैं। ऐसे हालात में निरंजनपुर सब्जी मंडी शहर में कोरोना संक्रमण का केंद्र बन सकती है।कोरोना संक्रमण का पहला केस मिलने के बाद भी जिम्मेदार महकमों ने गंभीरता नहीं दिखाई थी। नतीजा सबके सामने है। यहां कई आढ़ती और उनके परिजन कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। शुक्रवार को मंडी से 99 और शनिवार को 57 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। रविवार को मंडी बंद रही। सोमवार और मंगलवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां सैंपल लेने नहीं पहुंची। पूछने पर अधिकारियों ने कहा कि सैंपलिंग के लिए टीम नहीं है। ऐसे मे सवाल यही उठता है कि अगर बचाव के संसाधन नहीं हैं तो यहां कारोबार के लिए आ रहे आढ़ती, वेंडर और कर्मचारियों की सुरक्षा का जिम्मा कौन लेगा। क्या इन्हें भगवान के भरोसे छोड़ दिया जाए?