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बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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देहरादून: उत्तराखंड सिर्फ देवभूमि ही नहीं वीर भूमि भी है। यहां के वीर सपूत देश के लिए मर मिटने का जज्बा रखते हैं। सेना में भर्ती होना यहां के युवाओं के लिए सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि जुनून है, जिसके लिए वो अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। उत्तराखंड की इस गौरवशाली परंपरा को अब पहाड़ की यूथ बिग्रेड आगे बढ़ा रही है। इन्हीं युवाओं में से एक हैं देहरादून के सागर पालीवाल, जो आज आईएमए से पास आउट होकर सेना में अफर बन गए। सागर का परिवार नथुवावाला पुष्प विहार में रहता है। पिता ऑनरेरी कैप्टन राजेंद्र प्रसाद 8वीं गढ़वाल राइफल में तीन दशक की सेवा के बाद रिटायर हुए। मां दीपा पालीवाल गृहणी हैं। बेटे की शानदार उपलब्धि से माता-पिता गर्वित हैं। उन्होंने बताया कि सागर में बचपन से ही देश सेवा का जुनून था। इसी जुनून के चलते उन्होंने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से पढ़ाई की। बाद में एनडीए में चुन लिए गए। शनिवार को अंतिम पग भरते ही सागर भारतीय सेना में अफसर बन गए।