Advertisement
ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
चमोली: 15 जून की रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने जो हरकत की, उसे लेकर पूरे देश में गुस्सा है। गलवान घाटी में हुई झड़प में देश ने अपने एक सैन्य अफसर समेत 20 जवान खो दिए। भारत ने इस घटना को लेकर चीन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। हर भारतवासी चाहता है कि चीन को इस हिमाकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। बात जब चीन से जुड़े विवाद की हो तो साल 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध का जिक्र जरूर होता है। 58 साल पहले हुए इस युद्ध में सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय सेना ने चीन को कड़ा सबक सिखाया था। गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन के जवानों ने चीनी सैनिकों को नाकों चने चबवा दिए थे। बटालियन को 1962 के युद्ध में दो महावीर चक्र मिले थे। इस युद्ध में चीन के खिलाफ लड़ चुके सैनानियों में भी चीन के विश्वासघात को लेकर जबर्दस्त आक्रोश है। आगे जानिए बलंवत सिंह का क्या कहना है।