यूरोपीय देशों में उगने वाली लाल भिंडी अब उत्तराखंड में भी उगाई जा रही है। किसान अनिलदीप सिंह महाल अपने खेतों में काशी लालिमा भिंडी की खेती कर रहे हैं...
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अनुष्का ढौंडियाल
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Image: Farmers grow red lady finger in the field in Uttarakhand
उधमसिंह नगर: उत्तराखंड के किसान जहां खेती को घाटे का सौदा समझकर इससे मुंह फेर लेते हैं, वहीं सूबे में इस अवधारणा को तोड़ने वाले धरतीपुत्र भी हैं। जिन्होंने लीक से हटकर काम किया और इसमें सफलता भी हासिल की। इन्हीं किसानों में से एक हैं सितारगंज के किसान अनिलदीप सिंह महाल, जो कि यूरोप में उगने वाली भिंडी की खेती से अच्छा मुनाफा हासिल कर क्षेत्र के युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं। सितारगंज के किसान अनिलदीप सिंह महाल अपने खेतों में काशी लालिमा भिंडी उगा रहे हैं। आमतौर पर यूरोपीय देशों में उगने वाली ये लाल भिंडी अब उत्तराखंड के लोगों को भी खाने को मिलेगी। अनिलदीप अपने फॉर्म हाउस पर लाल भिंडी की खेती कर रहे हैं। इन दिनों वो लाल भिंडी का बीज तैयार कर रहे हैं। अनिलदीप बताते हैं कि इस भिंडी का बीज उन्होंने ऑनलाइन मंगाया था, जिसमें उनकी बेटी ने भी मदद की।
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लाल रंग की भिंडी अब तक पश्चिमी देशों में प्रचलन में रही है और भारत में आयात होती रही है। इसकी विभिन्न किस्मों की कीमत 100 से 500 रुपये प्रति किलो तक है। अनिलदीप सिंह महाल तिगड़ीफार्म के मालिक हैं। उन्होंने एलएलबी किया है, एमए की डिग्री भी हासिल की है। खेती उनका शौक है। लाल भिंडी की खेती का आइडिया कैसे आया, इस बारे में अनिलदीप बताते हैं कि पहली बार उन्होंने दिल्ली के खान मार्केट में लाल भिंडी देखी थी। तब उन्होंने सोचा क्यों ना इसे अपने खेतों में उगाया जाए। इसके बाद उन्होंने बेटी गुरवेना से मदद मांगी। गुरवेना ने पता लगाया कि ये भिंडी काशी लालिमा है। पिता-बेटी ने मिलकर भिंडी के बीज ऑनलाइन साइट से मंगाए। एक्सपेरिमेंट के तौर पर इसे एक बीघा भूमि पर उगाया। नतीजे शानदार रहे। अनिलदीप कहते हैं कि लाल भिंडी की बेहतर पैदावार हुई है। रिजल्ट से वो खुश हैं। अब वह इसका बीज तैयार करने में जुटे हैं।
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चलिए अब आपको लाल भिंडी की खूबियां बताते हैं। लाल भिंडी की लंबाई 11 से 14 सेमी होती है। प्रति हेक्टेयर भूमि में इसकी करीब 130 से 140 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है। ये भिंडी पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें आयरन है, कैल्शियम है और एंटी ऑक्सिडेंट तत्व भी हैं। ये पोषक तत्व महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी को पूरा करते हैं। गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करते हैं। शुगर और दिल के मरीजों के लिए भी इसका सेवन फायदेमंद है। देवभूमि में इसकी खेती करने वाले किसान अनिलदीप सिंह की गिनती सूबे के प्रगतिशील किसानों में होती है। लाल भिंडी से पहले वो फॉर्म हाउस पर काला, बैंगनी और नीला गेहूं भी उगा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने उनसे संपर्क किया है। कृषि वैज्ञानिकों की टीम जल्द ही उनके फॉर्म हाउस पर दौरे के लिए आने वाली है।