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केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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चमोली: वरिष्ठ पत्रकार और स्तम्भ कार इन्द्रेश मैखुरी ने अपने फेसबुक वॉल पर ये जानकारी दी है। हमारी भी आपसे अपील है कि कृपया आगे बढ़ें और जन आंदोलनकारी त्रेपन चौहान की मदद में सहयोग करें। साथ ही पोस्ट शेयर भी करें।
साथियो, त्रेपन चौहान उत्तराखंड में आंदोलनों का एक जाना पहचाना चेहरा हैं। विभिन्न आंदोलनों में उनकी सक्रिय हिस्सेदारी रही है। खासतौर पर टिहरी के फलेंडा में जल विद्युत परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों के आंदोलन का उन्होंने आगे बढ़ कर नेतृत्व किया। देहारादून में असंगठित मजदूरों को संगठित करने के काम भी त्रेपन भाई ने किया। "हे ब्वारी" और "यमुना" जैसे उपन्यासों के लेखक भी त्रेपन भाई हैं। लेकिन लंबे अरसे से त्रेपन भाई एक गंभीर बीमारी से गुजर रहे हैं। यह मोटर न्यूरोन्स का लगभग वैसा ही रोग है,जैसा प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग्स को था।