उत्तराखंड में दिखा रहस्यमयी मूंगे जैसी चमक वाला दुर्लभ सांप, जानिए इसकी खूबियां

हल्द्वानी से रेस्क्यू किया गया सांप रेड कोरल कुकरी प्रजाति का है। जो कि सांपों की दुर्लभ प्रजातियों मे से एक है। लाल रंग का दिखने वाला ये सांप बेहद दुर्लभ है।
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Haldwani News: Red coral cookery species seen in Uttarakhand
Image: Red coral cookery species seen in Uttarakhand

हल्द्वानी: सांपों की दुनिया बड़ी रहस्यमयी है। लोग इनसे डरते हैं और इनकी पूजा भी करते हैं। बरसात आने के साथ ही जगह-जगह सांप निकलने की घटनाएं हो रही हैं। इस दौरान कई जगह दुर्लभ प्रजाति के सांप भी देखने को मिले। नैनीताल के हल्द्वानी में भी दुर्लभ लाल मूंगा खुखरी सांप दिखाई दिया। ये सांप बिंदुखत्ता क्षेत्र में रहने वाले रविंद्र सिंह कोरंगा के घर से पकड़ा गया। हल्द्वानी के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि घर से रेस्क्यू किया गया सांप रेड कोरल कुकरी प्रजाति का है। जो कि सांपों की दुर्लभ प्रजातियों में से एक है। लाल रंग का दिखने वाला ये सांप बेहद दुर्लभ है। इसका शरीर मूंगे की तरह चमकता है। आम बोलचाल की भाषा में लोग इसे लाल मूंगा खुखरी सांप यानी रेड कोरल कुकरी स्नेक कहते हैं। इसका जूलॉजिकल नाम ओलिगोडोन खेरिएन्सिस है। इससे पहले इस प्रजाति के सांप को साल 2014 में खटीमा में देखा गया था। वहां ये सुरई रेंज में देखा गया। ये दीमक के टीलों में रहता है और अन्य सांपों और छिपकलियों के अंडे खाता है। ये दिखने में एकदम लाल होता है। इसमें मूंगे के पत्थर की तरह चमक होती है। आगे पढ़िए

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डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि खुरियाखत्ता इलाके में रहने वाले रविंद्र सिंह कोरंगा को लाल रंग का ये सांप घर की बाउंड्री पर रेंगते दिखा था। अजीब से सांप को देख कोरंगा परिवार बुरी तरह घबरा गया। उन्होंने वन विभाग की टीम को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर विभाग के स्नेक कैचर मौके पर पहुंचे और सांप को रेस्क्यू कर लिया। रेड कोरल कुकरी प्रजाति के इस सांप को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में शेड्यूल-4 का दर्जा हासिल है। दुर्लभ किस्म का ये चमकदार सांप जहरीला नहीं होता। यह सांप अक्सर बरसात के समय ही दिखाई देता है। बरसात में बिल में पानी भरने पर वह बाहर आ जाता है। इसका वास स्थल तराई है। इस सांप के बारे में अब भी लोगों को बहुत कम जानकारी मिल पाई है। जानकारी के मुताबिक साल 2014 से पहले ये सांप एक बार उत्तर-प्रदेश और एक बार पूर्वोत्तर के राज्य असम में देखा गया था। इसे अब तक कुछ ही बार देखा गया है।