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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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चम्पावत: कोरोना के कारण हम सब अपने-अपने घरों तक सिमट कर रह गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जमाने में सब फोन और इंटरनेट के माध्यम से दूसरे से जुड़े हुए हैं। शिक्षा व्यवस्था के ऊपर भी कोरोना का बेहद भारी प्रभाव पड़ा है। कई महीनों से स्कूल बंद हो रखे हैं और बच्चे घरों पर रहने में मजबूर हैं। ऐसे में कई स्कूलों द्वारा ऑनलाइन शिक्षा पर काफी अधिक जोर दिया जा रहा है। बच्चे पढ़ते वैसे ही हैं, मगर अब क्लासरूम सिमटकर एक छोटे से मोबाइल फोन के अंदर आ गया है। अब बच्चे फोन के द्वारा पढ़ते हैं और ऑनलाइन क्लासेस लेकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। मगर इस बीच हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि राज्य में कुछ ऐसे बच्चे भी हैं जिनके पास स्मार्टफोन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को करना पड़ रहा है। पहाड़ों में वैसे ही शिक्षा की हालत हम सबको पता है, ऊपर से स्कूलों के बंद होने से कई बच्चों की पढ़ाई रुक गई है। स्मार्टफोन जैसी सुविधा कई अभिभावक नहीं एफोर्ड कर पाते हैं। इस परिस्थिति में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा अपने कंधों पर उठाने का निर्णय लिया है। शिक्षा को सबतक पहुंचाना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। एक ऐसे ही शिक्षक के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जो कोरोना काल में उन बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे हैं जो ऑनलाइन पढ़ाई से अबतक वंचित रहे हैं। हम बात कर रहे हैं रापुमावि बिसारी के शिक्षक रवीन पचौली जो इस समय कुल 12 बच्चों को उनके घर जाकर पढ़ा रहे हैं और शिक्षक होने का दायित्व निभा रहे हैं। आगे पढ़िए