Advertisement
हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
Example Ads Media
उधमसिंह नगर: आईटीबीपी के जवान जमीर अहमद (54) की डोकलाम में शहादत के बाद सोमवार देर रात उनका पार्थिव शरीर उत्तराखंड स्थित किच्छा लाया गया। जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया। गांव में शोक की लहर दौड़ गई। किच्छा से शहीद की अंतिम विदाई की भावुक कर देने वाली तस्वीरें आई हैं। शहीद के परिजन तिरंगे में लिपटे ताबूत से लिपटकर देर तक बिलखते रहे। पार्थिव देह के साथ आईटीबीपी के अधिकारी भी किच्छा पहुंचे थे। अधिकारियों ने जवान की टोपी मृतक के बेटे सनाउल मुस्तफा को सौंपी। पिता की कैप देखकर सनाउल बिलख-बिलख कर रो पड़े। बेटे की ये हालत देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। सोमवार देर रात सैकड़ों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने जवान के अंतिम दर्शन कर उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। देर रात ही जवान के शव को सुपुर्दे खाक कर दिया गया। कब्रिस्तान में हल्दूचौड़ से आई आईटीबीपी की टीम ने जवान को अंतिम सलामी दी। 54 साल के जमीर अहमद मूलरूप से यूपी के बरेली के रहने वाले थे। वर्तमान में उनका परिवार उत्तराखंड के किच्छा मे रहता है।