गढ़वाल में मौजूद उबलते पानी का कुंड, यहां लोग पोटली में डालकर पकाते थे चावल

जोशीमठ-मलारी हाईवे पर सलधार के पास स्थित उबलते पानी का कुंड विलुप्त होने की कगार पर है और उसका पानी धीरे-धीरे बेहद कम होता जा रहा है। इस प्राकृतिक कुंड के अस्तित्व को बचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए-
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Garhwal Saldhar Pani: Boiling water reservoir in Garhwal
Image: Boiling water reservoir in Garhwal

चमोली: उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व-भर में प्रसिद्ध है। प्रकृति ने वाकई उत्तराखंड को कोई खास वरदान दिया है। राज्य में कई ऐसे मनोरम दृश्य अभी भी मौजूद हैं जो प्रकृति की अनोखी देन हैं और वे देवभूमि की धरोहर हैं। उन्हीं में से एक है जोशीमठ-मलारी हाईवे पर सलधार के पास स्थित उबलते पानी का कुंड। जी हां, उत्तराखंड का यह मशहूर कुंड बेहद अनोखा है और प्रकृति की एक अनोखी देन है। अगर आप कभी जोशीमठ-मलारी हाईवे के पास से गुजरे होंगे तो आपने यह कुंड जरूर देखा होगा। दूर-दूर से लोग इसको देखने आते हैं। इस कुंड की खास बात यह है की सर्दी हो या गर्मी हर समय इस कुंड के अंदर पानी गर्म रहता है। मगर चिंता की बात यह है कि अब यह कुंड विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। इस समय यहां पर बेहद कम गर्म पानी रह गया है और अगर इसके संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम या पहल नहीं की गई तो आने वाले समय में यह कुंड विलुप्त हो जाएगा और केवल किस्सों और कहानियों के अंदर ही जिंदा रहेगा।

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बता दें कि यह कुंड जोशीमठ -मलारी हाईवे पर 18 किलोमीटर की दूरी पर सलधार में स्थित है। प्रकृति से कोई अनोखा वरदान प्राप्त किए हुए इस कुंड का पानी भीषण सर्दी में भी उतना ही गर्म रहता है जितना कि गर्मियों में रहता है। अक्सर इसको देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां आने वाले कई लोग और मजदूर पहले इसके अंदर चावल की पोटली डाल देते थे और कुछ ही देर में चावल बनकर तैयार हो जाता था। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस कुंड का पानी कितना अधिक गर्म है। मगर अब यह कुंड विलुप्त की कगार पर है और उसका गर्म पानी बेहद कम होता जा रहा है। बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सर्दी और गर्मी दोनों सीजन में गर्म पानी वाला यह कुंड अनोखा है और प्रशासन को इसके संरक्षण की ओर ध्यान देने की बहुत जरूरत है।

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पर्यटन की दृष्टि से देखें तो ऐसे दृश्य पर्यटकों के लिए काफी आकर्षण का केंद्र साबित होते हैं। ऐसे में इनका विलुप्त होना पर्यटन पर भी असर डालेगा। इसी के साथ बिना मानवीय हस्तक्षेप के ऐसे प्राकृतिक चीजें राज्य की धरोहर हैं और उनका संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। मगर दुर्भाग्य से इस कुंड के संरक्षण को लेकर शासन और प्रशासन के स्तर से भी कोई भी तरीके की पहल नहीं की गई है। इसका पानी वाकई बहुत कम हो चुका है और अगर अब इसके संरक्षण में देरी की गई तो यह कुंड सदा के लिए खत्म।हो जाएगा और हमारी आने वाली पीढ़ी इस प्राकृतिक दृश्य को अनुभव नहीं कर पाएगी। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन क्षेत्राधिकारी धीरेंद्र सिंह बिष्ट के मुताबिक विभाग इसके संरक्षण के लिए योजना बना रहा है। कुंड का पानी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और जल्द ही इस दिशा में काम किया जाएगा ताकि उसका संरक्षण हो सके।