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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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चमोली: उत्तराखंड में हर पांच साल में सरकारें बदल रही हैं, लेकिन गांवों के हालत नहीं बदल रहे। गांवों में न सड़कें हैं न अस्पताल। हाल ये है कि 108 एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंचती। नतीजा, गर्भवती महिलाएं खेतों-सड़कों पर बच्चा जनने को मजबूर हैं। मामला चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड का है। जहां के लंगसी-तपोण गांव में रहने वाली महिला ने एंबुलेंस के अभाव में सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसूता मीना देवी 35 साल की हैं। उनका परिवार लंगसी-तपोण गांव में रहता है। मीना की डिलीवरी का वक्त करीब था। शुक्रवार रात को उनकी तबीयत खराब हो गई। पति दिनेश चंद्र हटवाल ने 108 एम्बुलेंस सेवा को फोन किया, एंबुलेंस के समय पर पहुंचने की उम्मीद कम ही थी। ऐसा ही हुआ भी। मीना की तबीयत बिगड़ती चली गई, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई।