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पिथौरागढ़: चारधाम ऑलवेदर रोड। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट। प्रोजेक्ट की शुरुआत के वक्त दावा किया गया था कि ये रोड बरसात के दौरान भी बंद नहीं होगी। रोड पर 12 महीने वाहनों की आवाजाही जारी रहेगी, लेकिन हो क्या रहा है, सब देख रहे हैं। प्रोजेक्ट के नाम पर जगह-जगह खुदी सड़कें यात्रियों और वाहन चालकों का दर्द बढ़ा रही हैं। रोड के 12 महीने खुले रहने के दावे भी दम तोड़ते दिख रहे हैं। अब पिथौरागढ़-टनकपुर के बीच बन रही रोड के हाल ही देख लें। करीब एक हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के तहत बनी ये रोड मलबा आने से साल में 182 बार बंद हुई। ये हम नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़े कह रहे हैं। एक न्यूज रपोर्ट के मुताबिक सड़क बंद होने से कई बार यात्रियों को 18-18 घंटे तक परेशानी झेलनी पड़ी। रोड पर मलबा आता है तो सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की कतारें नजर आने लगती हैं। लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का सामरिक महत्व भी है। ये सीमांत जिला चीन और नेपाल जैसे देशों से सटा है। आगे पढ़िए
ऐसे में केंद्र सरकार ने यहां साल 2016 में ऑलवेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत रोड बनाने की मंजूरी दी थी। 150 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के निर्माण पर करीब 1078 करोड़ रुपये खर्च होने थे। निर्माण के वक्त दावा किया गया था कि टनकपुर से पिथौरागढ़ का सफर सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा। सड़क के निर्माण के लिए जगह-जगह पहाड़ काटे गए। दो साल तक लोग मुसीबत झेलते रहे, लेकिन उन्हें तसल्ली थी कि परेशानी भरा ये वक्त जल्द गुजर जाएगा। रोड बनने से पिथौरागढ़ और चंपावत जिले को राहत मिलेगी, लेकिन अफसोस कि ऐसा हुआ नहीं। चंपावत जिले के आपदा कंट्रोल रूम के आंकड़े बताते हैं कि इसी साल जनवरी से अब तक यह सड़क 182 बार बंद हो चुकी है। कई बार तो हाईवे दो से तीन दिन तक भी बंद रहा है। यहां पहाड़ियों का ट्रीटमेंट भी कारगर नहीं रहा। जगह-जगह पहाड़ियां दरक रही हैं। हाईवे पर 12 से ज्यादा नए डेंजर जोन उभर आए हैं। इस तरह यात्रियों को राहत देने के लिए बनाई गई ये रोड राहत की जगह आफत का सबब बन गई है। यात्री खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं