शिक्षकों को 12 जुलाई से स्कूल आना सुनिश्चित किया गया है और शैक्षिक गतिविधियां संचालित किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है.
-
Komal Negi
-
Advertisement
हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
Example Ads Media
Image: Teachers will come in schools from July 12 in uttarakhand
देहरादून: उत्तराखंड शिक्षा विभाग से बड़ी खबर है, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के द्वारा शिक्षकों को स्कूल आने के निर्देश पर शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने आदेश जारी कर दिया है, जिसके तहत शिक्षकों को 12 जुलाई से स्कूल आना सुनिश्चित किया गया है और शैक्षिक गतिविधियां संचालित किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है, यानी कि शिक्षकों को 12 जुलाई से स्कूल आना अनिवार्य किया गया है। एक तरफ जहां सरकार के द्वारा शिक्षकों को स्कूल आने के लिए आदेश जारी कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के द्वारा प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों को कोविड-19 वैक्सीन लगाई जाएगी, शिक्षा सचिव ने इसको लेकर बकायदा आदेश जारी कर दिए हैं कि शासकीय एवं अशासकीय विद्यालय के शिक्षकों को कोविड 19 के अंतर्गत फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में वर्गीकृत करते हुए प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाई जाए, यानी की शिक्षा विभाग अब शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाई जाएगी। आगे पढ़िए
यह भी पढ़ें - मसूरी, नैनीताल, धनोल्टी, कैंपटी फॉल, टिहरी लेक खचाखच..कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ी
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के हाल पहले ही बुरे थे, रही-सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी। ऑनलाइन पढ़ाई का हाल आप जानते ही होंगे। नेटवर्क के लिए छात्र एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ के चक्कर लगाते दिखते हैं। स्कूलों पर ताला लगा है। जिन शिक्षकों पर ऑनलाइन पढ़ाई कराने की जिम्मेदारी है, उनमें से भी ज्यादातर बच्चों को सिर्फ होमवर्क देकर इतिश्री कर रहे हैं। शिक्षकों को छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा छात्रों को गूगल प्ले से पढ़ने का ऑप्शन भी दिया जाएगा। बता दें कि पिछले साल कोरोना की एंट्री के बाद मार्च से सभी स्कूल बंद कर दिए गए थे। बाद में नवंबर महीने में जैसे-तैसे स्कूलों को खोलने की शुरुआत हुई थी, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते एक बार फिर स्कूलों पर ताले लटक गए। पहाड़ी गांवों में हाल और बुरे हैं। यहां नेटवर्क की समस्या के चलते छात्र ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे।