शिक्षा विभाग प्रथम चरण में कक्षा छह से बड़ी कक्षाओं के छात्रों को 50 फीसदी क्षमता के साथ स्कूल आने की अनुमति दे सकता है। बेसिक की कक्षाओं के लिए भी रोस्टर बनाया जाएगा।
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Komal Negi
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Image: Schools to be opened in Uttarakhand
देहरादून: कोरोना के चलते हर किसी की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा असर उन नौनिहालों पर पड़ रहा है, जिनके सामने पूरा भविष्य पड़ा है, लेकिन स्कूल नहीं खुल रहे। अब जबकि प्रदेश में कोरोना के केस कम हो गए हैं तो स्कूलों के खुलने की उम्मीद भी जगी है। राज्य सरकार कोविड कर्फ्यू में सिनेमा हॉल, मनोरंजन पार्क, स्वीमिंग पूल, ऑडिटोरियम आदि को पचास फीसदी क्षमता के साथ खोलने की अनुमति दे चुकी है, ऐसे में उम्मीद है कि स्कूल भी जल्द ही खोले जाएंगे। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए विशेष प्लान तैयार किया गया है। योजना के अनुसार शिक्षा विभाग प्रथम चरण में कक्षा छह से बड़ी कक्षाओं के छात्रों को 50 फीसदी क्षमता के साथ स्कूल आने की अनुमति दे सकता है। बेसिक की कक्षाओं के लिए भी रोस्टर बनाया जा सकता है। हालांकि मंगलवार को आईसीएमआर ने पहले प्राइमरी स्कूल खोलने की सलाह दी है। ऐसे में राज्य सरकार अपनी नीति में बदलाव कर सकती है।
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शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने इसके संकेत भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि बीते डेढ़ साल से स्कूल करीब-करीब बंद ही हैं। इससे पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। अब ज्यादातर सेक्टर को छूट दी जा चुकी है तो स्कूलों को लेकर भी विचार किया जा रहा है। आपको बता दें कि पिछले साल मार्च में कोरोना की पहली लहर के दौरान स्कूल बंद कर दिए गए थे। नवंबर 2020 में 10वीं और 12वीं कक्षा को खोलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर आने पर स्कूल फिर बंद कर दिए गए। स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही। पहाड़ में नेटवर्क की समस्या है, इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई में भी तमाम दिक्कतें हैं। वहीं शिक्षक संगठन सरकार से छात्रों को स्कूल बुलाए जाने की पैरवी कर रहे हैं। कोरोना के केस कम होने पर स्कूलों को शिक्षकों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन बच्चों के लिए कक्षाएं कब से शुरू होंगी, इसे लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है।