कोरोना काल में नरेंद्र बिनवाल की जॉब गई तो उन्होंने ‘चायकुंड’ की शुरुआत कर अपने सपनों को जीना शुरू कर दिया। आज ये दोनों हर दिन हजारों कमा रहे हैं।
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Komal Negi
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Image: Narendra Tea Shop in Haldwani
हल्द्वानी: आपदा की चुनौतियों को अवसर में कैसे बदलना है, ये पहाड़ियों से बेहतर भला कौन जान सकता है। अब कोरोना काल का ही उदाहरण ले लें। इस बुरे वक्त में जहां कुछ लोग हाथ पर हाथ धरे हालात को कोसते रहे, तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने नई शुरुआत कर दूसरों के लिए मिसाल पेश की। हल्द्वानी के रहने वाले नरेन्द्र बिनवाल ऐसे ही कर्मठ युवाओं में से एक हैं। कोरोना काल में इनकी जॉब गई तो इन्होंने ‘चायकुंड’ की शुरुआत कर अपने सपनों को जीना शुरू कर दिया। हल्द्वानी दुर्गा सिटी सेंटर में बिग बाजार के पास ‘चायकुंड’ यानी चाय की दुकान है। जहां लोग अपने मनपसंद फ्लेवर की चाय की चुस्की लेने आते हैं। दुकान के संचालक नरेन्द्र गुड़गांव में एक होटल में नौकरी करते थे, लेकिन कोरोना काल में उनकी जॉब चली गई। नौकरी नहीं रही तो वो हल्द्वानी लौट आए और अपने लिए संभावनाएं तलाशने लगे।
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उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरणा ली और ‘चायकुंड’ का श्रीगणेश कर दिया। बस फिर क्या था, देखते ही देखते यहां चाय के शौकीन जुटने लगे।वर्तमान समय में 27 प्रकार की चाय उपलब्ध है, जिसमें गुलाबी चाय बहुत प्रसिद्ध है इसमें गुलाब की पंखुड़िया, बादाम, इलाइची आदि का मिश्रण है ! चाय की कीमत 10 से 50 रुपये रखी गई है, जो कि हर किसी की पहुंच में है। दुकान में रोजाना ढाई सौ से 300 चाय की बिक्री होती हैं। जिससे वह रोजाना करीब 10 हजार की बिक्री कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। यही नहीं चाय की दुकान में स्लोगन के माध्यम से लोगों को कई तरह के सामाजिक संदेश भी दिए जाते हैं। वास्तव में नरेन्द्र ने बता दिया कि जीवन में चाहे कितनी ही मुश्किलें हों, अगर हम पॉजिटिव रहें तो असंभव लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है। बस हमें हार नहीं माननी है, डटे रहना है ।