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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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पिथौरागढ़: इन दिनों उत्तराखंड में लगातार बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं। चमोली से लेकर पिथौरागढ़ तक ऐसा कोई पहाड़ी जिला नहीं, जहां पिछले दिनों बादल फटने की घटनाएं न हुई हों। रविवार को धारचूला में बादल फटने के बाद तबाही का सैलाब आ गया, जिसने कई लोगों की जान ले ली, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पहाड़ में आखिर इस तरह की घटनाएं क्यों होती हैं। पहाड़ी इलाकों में बादल आखिर फटते क्यों हैं? ऐसे ही कई सवाल हमारे मन में भी थे, जिनका जवाब हम वैज्ञानिकों से जानने की कोशिश करेंगे। पहले तो ये जान लेत हैं कि आखिर बादल फटना होता क्या है? जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. आरके सिंह बताते हैं कि अगर किसी एक जगह पर एक घंटे के दौरान 10 सेमी यानी 100 मिमी से ज्यादा बारिश हो जाए तो इसे हम बादल फटना कहते हैं। इसे क्लाउड बर्स्ट या फ्लैश फ्लड भी कहा जाता है। आगे पढ़िए