शॉर्ट फिल्म ‘बोल दियां ऊंमा’ की टीम के हाथ एक और बड़ी सफलता लगी है। भीतर तक झकझोर कर रख देने वाली ये उत्तराखंडी फिल्म टोरंटो मल्टीकल्चरल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी।
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Komal Negi
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Image: Bol diya unma garhwali film in Toronto film festival
देहरादून: ‘बोल दियां ऊंमा’। पहाड़ में पलायन के मुद्दे पर बनी ये गढ़वाली शॉर्ट फिल्म हर जगह खूब सराही जा रही है। हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस फिल्म के बारे में चर्चा हो रही है, लोगों ने इसे खूब प्यार दिया। अब ‘बोल दियां ऊंमा’ की टीम के हाथ एक और बड़ी सफलता लगी है। भीतर तक झकझोर कर रख देने वाली ये उत्तराखंडी फिल्म टोरंटो मल्टीकल्चरल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी। ये पूरे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। विश्वस्तरीय मंच पर फिल्म का प्रदर्शन होने पर देश-दुनिया के लोगों को उत्तराखंड और यहां के परिवेश के बारे में जानने का मौका मिलेगा। यहां की जिंदगी और लोगों के संघर्ष के बारे में पता चलेगा। गढ़वाली शॉर्ट फिल्म ‘बोल दियां ऊंमा’ फिल्म का निर्माण पलायन को ध्यान में रखकर किया गया है। रोजगार की तलाश में पहाड़ के युवा घर-बार छोड़कर शहरों में चले जाते हैं और पीछे छूट गए उनके परिवार के लिए जिंदगी हर गुजरते दिन के साथ मुश्किल होती जाती है। न जाने हम किस सुख के पीछे भाग रहे हैं। इस सुख को पाने के लिए पूरी जिंदगी खप जाती है। हम बच्चों के साथ उनका बचपन नहीं जी पाते, जीवनसाथी संग शांति के दो पल नहीं बिता पाते। रोजगार-पैसा जरूरी है, लेकिन किस कीमत पर? गढ़वाली शॉर्ट फिल्म ‘बोल दियां ऊंमा’ ऐसे ही कई सवाल उठाती है। पलायन और गांव की महिलाओं की पीड़ा पर बनी ये शानदार फिल्म आपको भीतर तक झकझोर कर रख देगी। आगे देखिए पूरी फिल्म
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लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की गाइडेंस में तैयार फिल्म का डायरेक्शन कविलास नेगी ने किया है। ओरिजनल स्टोरी का क्रेडिट वल्लभ डोभाल को जाता है। कलाकारों में अंजली नेगी और राजेश नौगांई का काम अच्छा है। फिल्म वाकई शानदार है, अगर अब तक नहीं देख पाए हैं तो एक बार देखिएगा जरूर।