उत्तराखंड: बंद होने वाला था बदहाल स्कूल, गुरुजी ने संवारा तो आने लगे छात्र...अब बना AC क्लासरूम

लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल (Gurna Primary School Pithoragarh) में भेजने से कतराते हैं, लेकिन अगर कोशिश की जाए तो इन स्कूलों को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
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Gurna Primary School: AC will be installed for students in Gurna Primary School Pithoragarh
Image: AC will be installed for students in Gurna Primary School Pithoragarh

पिथौरागढ़: प्रदेश के सरकारी स्कूलों का हाल किसी से छिपा नहीं है। सुविधाओं की कमी और शिक्षा के गिरते स्तर के चलते लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल (Gurna Primary School Pithoragarh) में भेजने से कतराते हैं, लेकिन अगर कोशिश की जाए तो इन स्कूलों को भी बेहतर बनाया जा सकता है। पिथौरागढ़ के गुरना प्राथमिक विद्यालय में इसी तरह के सराहनीय प्रयास हो रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों को मात देने वाले इस स्कूल में एयर कंडीशन की सुविधा जोड़ दी गई है। जन सहयोग से मिली सुविधा का बाल दिवस के मौके पर शुभारंभ किया गया। यहां आपको गुरना प्राथमिक विद्यालय की शानदार ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी के बारे में भी बताते हैं। साल 2015 से पहले इस स्कूल की हालत भी दूसरे सरकारी स्कूलों जैसी ही थी। छात्र संख्या कम होने के चलते स्कूल बंद होने की कगार पर था। तब प्रधानाध्यापक के तौर पर यहां सुभाष चंद्र जोशी की तैनाती हुई। उन्होंने यहां की समस्याओं पर मंथन किया, साथ ही इन्हें दूर करने के प्रयास भी करने शुरू कर दिए।

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उन्होंने स्कूल में हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम से भी बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। इस कोशिश के शानदार नतीजे निकले और कुछ ही दिनों में स्कूल में छात्र संख्या 150 से ऊपर पहुंच गई। जो बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे, उन्होंने सरकारी स्कूल में दाखिला ले लिया। यही नहीं खंड शिक्षा अधिकारी के बच्चे भी गुरना के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के लिए आने लगे। पिछले 5 सालों में यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, मध्याह्न भोजन के लिए हॉल बनवाया गया, साथ ही हर कक्षा में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की गई। इन कार्यों के लिए जनसहयोग के जरिए 30 लाख की धनराशि जुटाई गई है। अब स्कूल में एसी भी लग गया है। इस तरह बच्चों को अब गर्मी और सर्दी के मौसम में पढ़ाई के वक्त किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। गुरना प्राथमिक विद्यालय (Gurna Primary School Pithoragarh) की आज हर जगह तारीफ होती है। इस स्कूल और यहां के शिक्षकों ने साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ बेहतर करने की इच्छा हो तो सरकारी स्कूलों की दशा और दिशा बदलते देर नहीं लगेगी।