गढ़वाल: आपदा के बाद से स्कूल में ही रह रहा है ये परिवार, स्कूल के कमरे में ही हुई बेटी की शादी

सरकार की अनदेखी के चलते आपदा प्रभावित परिवारों के 6 से 7 लोग सरकारी स्कूल (uttarkashi Inter College Mustiksaur Mohan Gusain) के एक-एक कमरे में जीवनयापन करने को मजबूर हैं।
Advertisement ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
uttarkashi Inter College Mustiksaur Mohan Gusain: Mohan Singh living in Uttarkashi government school
Image: Mohan Singh living in Uttarkashi government school

उत्तरकाशी: एक घर सिर्फ चार दीवारों का ढांचा भर नहीं होता। ये वो जगह है, जहां हमारा बचपन बीतता है, यहीं पर हम जिंदगी का ककहरा सिखते हैं, नई यादें संजोते हैं, लेकिन जब तिनका-तिनका जोड़कर बनाए गए ये घर बिखरते हैं, तो जिंदगी भी मानों बिखर सी जाती है। उत्तरकाशी के कंकराड़ी गांव (uttarkashi Inter College Mustiksaur Mohan Gusain) के तीन परिवार ऐसे ही दर्द से गुजर रहे हैं। चार महीने पहले जुलाई में आई आपदा के चलते गांव के लोगों के घर और दुकानें आपदा की भेंट चढ़ गई थीं। रहने को छत न रही तो प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को राजकीय इंटर कॉलेज मुस्टिकसौड़ के भवन के एक-एक कमरे में ठहरा दिया। 4 महीने से ये परिवार इन्हीं कमरों में गुजारा कर रहे हैं। सिर पर छत न रहने की वजह से पिछले दिनों आपदा प्रभावित मोहन सिंह गुसाईं की छोटी बेटी रोशनी की शादी भी सरकारी स्कूल के एक कमरे में ही संपन्न करानी पड़ी। हर पिता की तरह मोहन सिंह भी अपनी बेटी को घर से विदा करना चाहते थे, लेकिन अरमान दिल में ही रह गए। रोशनी के परिवार को सरकारी स्कूल के एक कमरे में ही पूरी व्यवस्थाएं बनाकर रोशनी की शादी कर उसे विदा करना पड़ा। आगे पढ़िए

यह भी पढ़ें - उत्तराखंड के 3 गांवों पर नेपाल ने ठोका अपना दावा, जनगणना के लिए भेजी टीमें
पीड़ित मोहन सिंह गुसाईं की बेटी रोशनी ने कहा कि हर बेटी का अरमान होता है कि जिस आंगन में बचपन बीता, उसी आंगन से डोली उठे, लेकिन सरकार और प्रशासन की बेरुखी के कारण उनके परिवार को सरकारी स्कूल में ही शादी की सभी रस्मों को निभाना पड़ा। हाल ये है कि अब सरकार के मुलाजिम उनका हाल पूछने की जहमत तक नहीं उठा रहे। बता दें कि बीते 18-19 जुलाई 2021 को उत्तरकाशी जनपद के मांडो, निराकोट सहित कंकराड़ी गांव में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला था। मकानों के खतरे की जद में आने के बाद कंकराड़ी गांव के तीन परिवारों को सरकारी स्कूल के एक-एक कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन ने इन परिवारों के विस्थापन की बात कही थी, लेकिन गुजरते वक्त के साथ प्रशासन और सरकार इन्हें भूल गई। सरकार की अनदेखी के चलते प्रभावित परिवारों के 6 से 7 लोग सरकारी स्कूल (uttarkashi Inter College Mustiksaur Mohan Gusain) के एक-एक कमरे में जीवनयापन करने को मजबूर हैं।