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देहरादून: बीजेपी ने चुनाव से ठीक पहले हरक सिंह रावत को पार्टी से बर्खास्त कर उनके बगावती तेवरों से हो रहे नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। हरक न सिर्फ पार्टी से बल्कि मंत्रिमंडल से भी हटा दिए गए। हालिया घटनाक्रम से प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है तो वहीं हरक के तेवर अब भी नरम नहीं पड़े हैं। हरक दिल्ली में हैं और आज एक अन्य बीजेपी विधायक के साथ कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। इसके लिए कांग्रेस आलाकमान की भी हरी झंडी मिल चुकी है।
उधर, बीजेपी से निष्कासन के बाद हरक बेहद भावुक नजर आए। एएनआई से बातचीत के दौरान उनका दर्द छलक उठा और वो फूट-फूटकर रोने लगे। हरक सिंह रावत ने कहा कि देश चलाने वाले बीजेपी के नेताओं ने सोशल मीडिया की मनगढ़ंत बातें सुनकर इतना बड़ा फैसला ले लिया। विनाश काले विपरीत बुद्धि, क्योंकि बड़े- बड़े नेता ऐसे फैसले लेते हैं, जो विनाश के पहले गलत होते है।
हरक आगे कहते हैं कि जिस दिन मैं मुंह खोल दूंगा उस दिन देश की राजनीति में विस्फोट हो जाएगा। मुझे मंत्री बनने का शौक नहीं है, मुझे काम करने का शौक है। कोटद्वार में स्कूल बन जाता तो क्या मेरे बच्चे वहां पढ़ते। हरक ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी वाले बोल रहे हैं, टिकट मांग रहा है। क्या पार्टी ने राजनाथ सिंह के बेटे को टिकट नहीं दिया। उस वक्त कहां गये आपके सिद्धांत।
मैं विकास के मामलों में राजनीति से ऊपर उठकर सोचता हूं। बता दें कि हरक सिंह रावत पिछले पांच सालों में कई बार पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके थे। रविवार को उन्हें निष्कासित कर दिया गया। बीजेपी के इस फैसले को अनुशासन के लिहाज से कड़ा संदेश माना जा रहा है।