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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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देहरादून: उत्तराखंड का संगीत जगत स्तब्ध है। पहाड़ी अ-कापेला, नंदू मामा की स्याली, ऊडांदू भौंरा जैसे शानदार गीतों को पिरोने वाले गुंजन डंगवाल अब हमारे बीच नहीं रहे।
गुंजन डंगवाल उत्तराखंड के संगीत जगत का एक जाना पहचाना चेहरा हैं। खबर है कि गुंजन डंगवाल किसी काम के लिए चंडीगढ़ गए थे। वहां पंचकूला में एक भीषण हादसा हो गया। इस हादसे में गुंजन का मौके पर ही निधन हो गया। गुंजन हाल ही है में पहाड़ी अ-कपेला 3 की तैयारी कर रहे थे। अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने लोगों को इस बारे में जानकारी दी थी। गुंजन ने अपनी मेहनत और लगन से बहुत ही कम वक्त में उत्तराखंड के संगीत जगत में अपना नाम कर लिया था। अगर इस वक्त उत्तराखँड में बेहतरीन म्यूजिक डायरेक्टर के नाम गिने जाएं, तो उन चंद युवाओं में गुंजन का नाम भी है। संगीत में प्रयोग और गीतों में बेजोड़ शब्दों के माध्यम से वो हर प्रस्तुति को बेहतरीन बना देते थे। गुंजन के जाने से उत्तराखँड के संगीत जगत को एक बड़ा झटका लगा है। हर कोई सन्न है, निशब्द है, स्तब्ध है।