अंकिता की मौत के बाद ऋषिकेश और हरिद्वार के तमाम होटल और रिजॉर्ट से पुलिस की कार्रवाई की तस्वीरें सामने आईं, जिससे पर्यटकों में गलत संदेश जा रहा है।
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कोमल नेगी
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Image: Uttarakhand tourism sector declines after Ankita murder case
ऋषिकेश: अंकिता हत्याकांड को लेकर देवभूमि के लोगों में गुस्सा है। इस घटना से जहां उत्तराखंड सरकार की किरकिरी हुई है, वहीं प्रदेश के टूरिज्म सेक्टर को भी नुकसान पहुंच रहा है।
Ankita murder case Uttarakhand tourism sector declines
इस जघन्य हत्याकांड के सामने आने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में चल रहे होटल, रिजॉर्ट और होम स्टे को लेकर कारवाई के आदेश जारी किये। जिसके बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई और कई होटल-रिजॉर्ट्स सील कर दिए गए। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने भी तमाम जनपदों के लिए एक आदेश जारी किया है, जिसमें होटल, रिजॉर्ट और स्पा में काम करने वाले कर्मचारियों से कहा गया है कि किसी भी तरह की दिक्कत-परेशानी होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। अंकिता की मौत के बाद ऋषिकेश और हरिद्वार में जंगलों के बीचो-बीच बने तमाम होटल और रिजॉर्ट से पुलिस की कार्रवाई की तस्वीरें सामने आने लगी हैं, और पुलिसिया कार्रवाई से पर्यटकों में डर का माहौल बन गया है। इन दिनों उत्तराखंड पुलिस रिजॉर्ट्स-होटलों के रिसेप्शन पर जाकर रजिस्टर चेक करने के साथ रिजॉर्ट के मानक भी चेक कर रही है। ऋषिकेश और घटनास्थल के आसपास के कई होटलों और रिजॉर्ट को सील किया गया है। मसूरी और नैनीताल जैसे टूरिस्ट स्पॉट पर भी होटलों की चेकिंग हो रही है। ऐसे में राष्ट्रीय मीडिया में एक तस्वीर गई, जिसमें यह संदेश गया कि उत्तराखंड के होटलों और रिजॉर्टस को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। इसका साइड इफेक्ट यह हुआ कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटक अब यहां आने से बच रहे हैं। आगे पढ़िए
जिन पर्यटकों ने शनिवार और रविवार को ऋषिकेश, नैनीताल, मसूरी और हरिद्वार जैसे पर्यटक स्थलों की बुकिंग की थी, उन्होंने अपनी बुकिंग कैंसिल करवानी शुरू कर दी है। यह सिलसिला शनिवार, रविवार के बाद सोमवार, मंगलवार और बुधवार को भी जारी रहा। जिससे उत्तराखंड पर्यटन से जुड़े व्यापारी परेशान हैं। होटल संचालकों का कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान आने वाले पर्यटक अमूमन एक या दो दिन यहां रुक जाया करते थे, लेकिन फिलहाल पुलिस की कार्रवाई की तस्वीरें बाहर आने के बाद पर्यटक बुकिंग कैंसिल करा रहे हैं। राफ्टिंग और कैंपिंग को भी संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। ऐसा होना यहां के पर्यटन और स्थानीय लोगों के लिए ठीक नहीं है। जिस तरह की तस्वीरें उत्तराखंड से गई हैं, उससे पर्यटकों में डर का माहौल बन गया है।