अंकिता भंडारी केस में कुमार विश्वास ने शुरू की नई बहस, पब्लिक ने किया खुलकर समर्थन

मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास की पोस्ट ने एक नई बहस खड़ी कर दी है। ज्यादातर यूजर्स उनके तर्क पर सहमति जताते हुए कमेंट लिख रहे हैं।
Advertisement Best Hidden Treks in Kedar Himalaya for True Mountain Lovers

A chance to reconnect with nature and inner peace. Treks in Kedar Himalaya that stay with you for a lifetime.

Example Ads Media
ankita bhandari kumar biswas: Kumar Vishwas tweet about Ankita Bhandari murder case
Image: Kumar Vishwas tweet about Ankita Bhandari murder case

ऋषिकेश: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत जारी है। प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन कर हत्यारोपियों को फांसी देने की मांग की जा रही है।

Kumar Vishwas tweet about Ankita Bhandari

इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। जिस पर मशहूर कवि कुमार विश्वास ने सवाल उठाए हैं। कुमार विश्वास ने ट्वीट में लिखा कि ‘पर क्यूँ ? सत्ता के अहंकार में डूबे उस नीच दुर्योधन के कुकर्मों का मुआवज़ा टैक्स-पेयर के पैसे से क्यूँ दिया जाएगा? उस नराधम के रिसोर्ट और सम्पत्तियों की नीलामी करके इस बिटिया के परिजनों को सारा धन दिया जाए। अनाचार करें पॉलिटिकल परिवार के संरक्षण में पले बेलगाम लड़के और भरे जनता ?’ इस तरह डॉ. कुमार विश्वास की इस पोस्ट ने एक नई बहस खड़ी कर दी है। ट्वीट के वायरल होते ही डॉ. कुमार विश्वास के बयान पर कमेंट करने वालों की लाइन लग गई। ज्यादातर यूजर्स उनके तर्क पर सहमति जताते हुए कमेंट लिख रहे हैं।

यूजर दीपक चतुर्वेदी ने लिखा कि ‘बिल्कुल सही कहा आपने, ये सत्ता के लोभी धृष्टराज बने बैठे हैं, अंकिता के परिवार को मुआवजा देने का ऐलान ऐसे कर रहे हैं, जैसे इनकी पारिवारिक संपत्ति सरकारी खजाने में भरी हो? विनोद आर्य की सारी संपति की कुर्की करके अंकिता की भरपाई नहीं हो सकती मूर्खो को पता नहीं क्या?’। इसी तरह प्रिंस तिवारी लिखते हैं ‘बिल्कुल सही बात की है आपने। ये राजनीति के धृतराष्ट्र केवल हर समस्या का एक ही उपाय जानते हैं मुआवजा। चाहे मामला हत्या का हो या व्यभिचार का’। कुलभूषण सिंह कहते हैं ‘कुछ नहीं होगा वो सत्ता पक्ष के नेताओं का लड़का है, सब घड़ियाली आंसू रो रहे हैं ताकि कोई बाद में यह न कहे कि अंकिता के लिए कुछ कहा ही नहीं, क्योंकि उसे सत्ता पक्ष के लोगों ने मारा। आप वहां क्यों नहीं जाते और अंकिता के लिए वहीं बैठ कर इंसाफ क्यों नहीं मांगते? घड़ियाली आंसू मत बहाओ’।