Joshimath sinking: आपदा की वजह का नहीं चला पता, तबाही का मंजर देख वैज्ञानिक भी डरे

Joshimath sinking latest update: जोशीमठ में हर तरफ बस तबाही का मंजर नजर आ रहा है। हालांकि ये सब हो क्यों रहा है, इसका जवाब विशेषज्ञों के पास भी नहीं है। हर कोई बस अनुमान ही लगा रहा है।
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joshimath sinking: Joshimath Sinking LandSlide Scientific Report
Image: Joshimath Sinking LandSlide Scientific Report

चमोली: किसने सोचा था कि एक दिन आपदा भगवान बदरीनाथ धाम के प्रवेश द्वार तक पहुंच जाएगी। जोशीमठ भूधंसाव की चपेट में है। डरे हुए लोगों ने अपने घर छोड़ दिए हैं।

Joshimath Sinking LandSlide Scientific Report

हर तरफ बस तबाही का मंजर नजर आ रहा है। हालांकि ये सब हो क्यों रहा है, इसका जवाब विशेषज्ञों के पास भी नहीं है। हर कोई बस अनुमान ही लगा रहा है। बीते दिनों विशेषज्ञों की टीम बदरीनाथ पहुंची तो दर्जनों घरों, इमारतों की दीवारों, दरवाजों और फर्श पर गहरी दरारें नजर आईं। शहर के नीचे पानी का बेतरतीब ढंग से रिसाव हो रहा है। जिसका कोई एक सिरा नहीं है। जो लोग जोशीमठ में रह रहे हैं, वो रात को घरों के फर्श के नीचे पानी के बहने की आवाज सुनकर डरे हुए हैं। ये पानी आ कहां से रहा है, ये भी पता नहीं चल सका है। जोशीमठ को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि इसके लिए एनटीपीसी की टनल जिम्मेदार है, हालांकि जब टीम ने एनटीपीसी के तपोवन-विष्णुगाड़ बिजली प्रोजेक्ट की टनल का भी मुआयना किया, तो वहां भी कुछ पता नहीं चला।

Joshimath sinking latest update

शुक्रवार को सचिव आपदा प्रबंधन डॉ.रंजीत सिन्हा और गढ़वाल मंडलायुक्त सुशील कुमार की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम पहले मनोहरबाग गई। यहां फर्श पर जगह-जगह दरारें देखने को मिलीं। लोग गुस्से में थे, विशेषज्ञों को अपने धंसते घर दिखा रहे थे। टीम थोड़ा आगे बढ़ी तो जेपी कॉलोनी स्थित होटल अलकनंदा का पुश्ता ढहने से उसका आगे का हिस्सा हवा में लटका हुआ मिला। इस टीम में भूस्खलन, हाइड्रोलॉजी, हिमालयन जियोलॉजी, आपदा प्रबंधन, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हैं। हालांकि जोशीमठ में भूधंसाव की वजह का अब तक पता नहीं चला है। गढ़वाल आयुक्त सुशील कुमार ने कहा कि फिलहाल निष्कर्ष पर एकदम पहुंचना बहुत कठिन है। यह एक साइंटिफिक स्टडी है, जिस पर हम काम कर रहे हैं। इस रिसाव का कारण क्या हैं, यह तत्काल कहना कठिन होगा। फिलहाल विशेषज्ञ लोगों से बातचीत कर हालात समझने की कोशिश कर रहे हैं।