Advertisement
ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
चमोली: बद्रीनाथ धाम में लगातार बर्फबारी हो रही है और बर्फबारी के बीच खाने की ढूंढ में हाल ही में एक भालू ने कई घरों धर्मशालाओं के दरवाजे तोड़कर नुकसान पहुंचाया है।
भवन स्वामी ने इसकी सूचना प्रशासन व वन विभाग को दी वह भालू के आतंक से निजात की मांग की है। बता दें कि शीतकाल में बदरीनाथ धाम के कपाट बंद रहते हैं। और खाली घर बर्फ से ढके रहते हैं। वहीं लोग बदरीनाथ को छोड़कर शीतकाल में निचले स्थानों पर आ जाते हैं। और खाली जगह देख कर इस बार शीतकाल में खास तौर पर फरवरी माह में भालूओं ने धाम में जमकर आतंक मचाया। बर्फ के बीच खाने की ढूंढ में भालू ने कई घरों, धर्मशालाओं के दरवाजे तोड़कर नुकसान पहुंचाया है। सूचना के बाद भवन स्वामियों ने जिला प्रशासन से इसकी शिकायत कर बताया कि फरवरी में महायोजना का कार्य बंद होने के चलते बदरीनाथ धाम में सुरक्षा पर तैनात आइटीबीपी व मंदिर समिति के कर्मचारियों के अलावा आश्रमों में तपस्या कर रहे कुछ साधु संत ही मौजूद थे। आगे पढ़िए
इसी दौरान भालू के झुंड ने बदरीनाथ में उत्पात मचाया है। बदरीनाथ धाम में तप करे रहे बर्फानी बाबा ने इसकी सूचना भवन स्वामियों को दी। भवन स्वामी मुकेश अलखानिया ने बताया कि बर्फानी बाबा ने उन्हें बताया कि इंद्र भवन अलखानिया मोहल्ले में उनके घरों के दरवाजे को तोड़कर भालू ने घर के अंदर रखे सामानों को नुकसान पहुंचाया है। वहीं भवन स्वामी ने इसकी सूचना प्रशासन व वन विभाग को दी। बता दें कि बदरीनाथ धाम सहित , माणा, नीती घाटी के गांवों में भी शीतकाल में भालू का आतंक बरकरार है। यहां भालू लोगों की घरों की छत फाड़कर या फिर दरवाजे तोड़कर घरों के अंदर प्रवेश करते रहे हैं और जमकर उत्पात मचाते हैं।