Rudraprayag News: ऊखीमठ में दिनदहाड़े भालू का हमला, दरांती से सामना कर महिला ने बचाई जान

ऊखीमठ के पठाली गांव में घास लेने गई 55 वर्षीय महिला पर भालू ने दिनदहाड़े हमला कर दिया। महिला ने दरांती से मुकाबला कर जान बचाई। छह टांके लगे, वन विभाग की गश्ती टीम तैनात।
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Ukhimath Bear Attack: 55-year-old woman attacked by bear in Ukhimath
Image: 55-year-old woman attacked by bear in Ukhimath

रुद्रप्रयाग: जनपद रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ के पठाली गांव में रामेश्वरी देवी पर घास काटने के दौरान भालू ने हमला कर दिया। महिला ने दरांती से भालू का सामना कर खुद को बचाया। घायल महिला को उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है।

55-year-old woman attacked by bear in Ukhimath

जानकारी के अनुसार रुद्रप्रयाग जिले के तहसील मुख्यालय ऊखीमठ से करीब तीन किलोमीटर दूर ग्राम पठाली में दिनदहाड़े भालू के हमले से हड़कंप मच गया। ग्राम प्रधान मनबर सिंह नेगी की पत्नी रामेश्वरी देवी (55) सुबह करीब साढ़े दस बजे अपने घर से लगभग 500 मीटर दूर एरेठी सुबदा तोक में घास लेने गई थीं। इसी दौरान अचानक एक भालू ने उन पर हमला कर दिया।
भालू के हमले से घबराने के बजाय रामेश्वरी देवी ने साहस दिखाया। उन्होंने हाथ में मौजूद दरांती से भालू पर प्रहार कर अपना बचाव किया। संघर्ष के दौरान वह खेत से नीचे की ओर लुढ़क गईं, लेकिन शोर मचाते हुए किसी तरह आधे रास्ते तक पहुंच गईं। शोर सुनकर उनके पति घटनास्थल की ओर दौड़े। तब तक भालू वहां से भाग चुका था।

हाथ में गंभीर चोट, छह टांके लगे

हमले में महिला के दाहिने हाथ पर गंभीर चोट आई। परिजनों ने उन्हें तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग रेफर किया गया। रजत सुमन, डीएफओ, ने बताया कि महिला की स्थिति सामान्य है और डॉक्टरों ने उनके हाथ पर छह टांके लगाए हैं। उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। घटना के बाद वन विभाग ने पठाली गांव में गश्ती टीम तैनात कर दी है। टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और वे वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता

पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जंगलों के सीमित होते दायरे और भोजन की कमी के चलते जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीणों को सतर्क रहना चाहिए और अकेले जंगल या खेतों में जाने से बचना चाहिए।