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देहरादून: देहरादून के रायपुर क्षेत्र में जमीन खरीदने की प्लानिंग कर रहे लोग ध्यान दें।
अगले छह महीने तक लोग रायपुर में बनने वाले विधानसभा और सचिवालय भवन के आसपास जमीन नहीं खरीद पाएंगे। राज्य सरकार ने जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। आवास विभाग ने थानो चौक तक मौजूद जमीनों की बिक्री पर 6 महीने तक के लिए रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था। जिसे कैबिनेट ने थानो रोड स्थित कालीमठ भोपालपानी तक सीमित करते हुए मंजूरी दे दी। इस दायरे में विधानसभा-सचिवालय के अलावा सरकारी कार्यालय भी बनाए जाने हैं। नए विधानसभा भवन और सचिवालय भवन बनाने की जरूरत क्यों आन पड़ी, ये भी जान लें। दरअसल मौजूदा विधानसभा भवन में पहले मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय था। सरकार ने इस भवन का विस्तार किया, और इसे विधानसभा का स्वरूप दिया। अब जमीन की उपलब्धता न होने से भविष्य में इसके विस्तार की कोई उम्मीद नहीं है। आगे पढ़िए
विधानसभा भवन क्योंकि शहर के बीचोंबीच स्थित है, ऐसे में सत्र के दौरान लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। तमाम दिक्कतों को देखते हुए साल 2007 में खंडूरी सरकार में विधानसभा-सचिवालय भवन के साथ ही अफसरों के आवास के लिए रायपुर में रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन चिन्हित की गई थी। साल 2012 में विजय बहुगुणा सरकार ने पहल करते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को इसका प्रस्ताव भेजा था। जिसके बाद 59.93 हेक्टेयर जमीन राज्य संपत्ति विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है। इसके एवज में विभाग 7.52 करोड़ रुपए वन विभाग को दे चुका है। लेकिन दिक्कत ये है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने विधानसभा भवन व सचिवालय भवन निर्माण को तो मंजूरी दी, लेकिन आवासीय परिसर निर्माण को एनओसी नहीं दी। अब माना जा रहा है कि राज्य सरकार आवासीय भवन बनाने के लिए आसपास की जमीन अधिग्रहित कर सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रस्तावित विधानसभा भवन के आसपास जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है।