ये केदारनाथ में आपदा की आहट तो नहीं? एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार हुआ हिमस्खलन

ये 8 जून को आए हिमस्खलन जितना बड़ा नहीं था मगर फिर भी यह चिंता करने वाली बात है कि हफ्ते भर के भीतर केदारनाथ में दो हिमस्खलन हो गए हैं।
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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kedarnath avalanche: Avalanche came for second time in Kedarnath
Image: Avalanche came for second time in Kedarnath

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के केदारनाथ से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है।

Avalanche in Kedarnath

केदारनाथ में इस समय पूरे देश दुनिया से लोग यात्रा पर आ रखे हैं। यहां कई राज्यों से तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ है। लेकिन, केदारनाथ धाम पर बड़ा अपडेट सामने आया है। केदारनाथ धाम के पीछे पहाड़ियों में सोमवार सुबह करीब 8 बजकर 56 मिनट पर भारी हिमस्खलन हुआ है। यह 8 जून को आए हिमस्खलन जितना बड़ा नहीं था मगर फिर भी यह चिंता करने वाली बात है कि हफ्ते भर के भीतर केदारनाथ में दो हिमस्खलन हो गए हैं। केदारनाथ मंदिर के पुजारी आनंद शुक्ला ने हिमस्खलन की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर के आसपास के पहाड़ों पर गुरुवार को भारी हिमस्खलन हुआ था, लेकिन ताजा हिमस्खलन पहले की तुलना में इतना बड़ा नहीं था। हिमस्खलन के समय वह भक्तों से मिलने के लिए मंदिर जा रहे थे। इसी तरह का हिमस्खलन 4 जून को हेमकुंड साहिब के रास्ते में हुआ था।

3 मई को केदारनाथ मंदिर से तीन किमी आगे 16 किमी केदारनाथ धाम ट्रेक मार्ग पर कुबेर ग्लेशियर टूट गया। एसडीआरएफ के जवानों ने ग्लेशियर टूटने वाले क्षेत्र में फंसे चार नेपाली कुलियों को बचाया था। वहीं 4 मई को, रुद्रप्रयाग जिले में तीर्थस्थल से लगभग तीन किलोमीटर आगे भैरव पड़ाव में फिर से एक ग्लेशियर टूट गया। चलिए आपको बताते हैं कि हिमस्खलन क्या होता है और आगे का पहाड़ी क्षेत्रों में क्यों होता है?बर्फीली पहाड़ियां यानी वैसा पहाड़ जो बर्फ से ढका हो। जब इस तरह की पहाड़ियों पर बर्फ की चादरे कहीं पर कमजोर हो जाती हैं तो खिसक जाती हैं। उसी घटना को हिमस्खलन कहा जाता है।जब ये चट्टाने नीचे की ओर आती हैं तो इसके साथ कई बड़े-बड़े चट्टान भी साथ में आती हैं। इसके आलावा पत्थर, पेड़-पौधे और सारा मलबा भी आता है। इसको हम हिमस्खलन कहते हैं। उत्तराखंड में हिमस्खलन बेहद आम है मगर गर्मियों के मौसम में लगातार हिमस्खलन होना अच्छा संकेत नहीं है।