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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ का पाली गांव...आपने भले ही इस गांव का नाम न सुना हो, लेकिन यहां के एक होनहार क्रिकेटर को जरूर जानते होंगे।
जी हां, हम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ऋषभ पंत की बात कर रहे हैं। ऋषभ पंत भेरंग पट्टी के पाली गांव के रहने वाले हैं। कहने को गंगोलीहाट का ये गांव एक बड़े क्रिकेटर का गांव है, लेकिन हाल ये है कि इस गांव में आज तक सड़क नहीं पहुंच सकी। ग्रामीण लंबे समय से सड़क के निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा। अब ग्रामीणों को बस ऋषभ पंत के गांव आने का इंतजार है। वो कहते हैं कि ऋषभ पंत कई सालों से गांव नहीं आए हैं। अगर वह एक बार गांव आ जाएं तो सड़क भी बन जाएगी। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बीमार और बुजुर्गों को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ढलान में बसे इस गांव के ज्यादातर परिवारों ने सड़क नहीं होने के चलते गांव छोड़ दिया है।
वर्तमान में यहां 28 परिवार रह रहे हैं, उन्हें भी हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। क्रिकेटर ऋषभ पंत के चचेरे भाई चंद्रशेखर पंत कहते हैं कि अगर ऋषभ पंत एक बार गांव आ जाएंगे तो प्रशासनिक अधिकारी से लेकर सीएम तक उनके गांव के विकास की ओर ध्यान देंगे। सड़क न होने के कारण यहां के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क मार्ग तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। कोई बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि ऋषभ और उनका परिवार लंबे वक्त से गांव नहीं आए हैं। उनका पुश्तैनी मकान जगह-जगह टूटने लगा है। ऋषभ और उनके परिवार को एक बार गांव आना चाहिए। वहीं मामले को लेकर गंगोलीहाट विधायक फकीर राम टम्टा ने कहा कि क्रिकेटर ऋषभ पंत के गांव के लिए स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के तहत दो किमी सड़क स्वीकृत है। सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।