उत्तराखंड चुनाव 2027: UKD ने 16 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की, थर्ड फ्रंट बनाने की तैयारी तेज

उत्तराखंड क्रांति दल ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 16 सीटों पर प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी अब 14 क्षेत्रीय दलों और संगठनों को साथ लाकर भाजपा-कांग्रेस के सामने तीसरा राजनीतिक विकल्प तैयार करने की कोशिश में है।
Advertisement चारधाम यात्रा 2026 पैकेज बुकिंग शुरू! ये ऑफर मिस किया तो पछताओगे

चारधाम यात्रा 2026 का सबसे सस्ता पैकेज? कीमत जानकर चौंक जाएंगे!

Example Ads Media
Uttarakhand Election 2027: UKD Announces 16 Candidates for Uttarakhand Polls 2027
Image: UKD Announces 16 Candidates for Uttarakhand Polls 2027

देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने लगी हैं। इस बार राज्य की क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने भाजपा और कांग्रेस से पहले 16 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर चुनावी मैदान में कदम बढ़ा दिया है। इसके साथ ही पार्टी अन्य क्षेत्रीय दलों और संगठनों को एक मंच पर लाकर तीसरा राजनीतिक विकल्प तैयार करने की कोशिश में जुटी है। हालांकि, उत्तराखंड की राजनीति में तीसरे मोर्चे की चर्चा नई नहीं है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी खुद को भाजपा और कांग्रेस के विकल्प के रूप में पेश किया था, लेकिन पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। ऐसे में 2027 में UKD की रणनीति और क्षेत्रीय दलों की एकजुटता पर सबकी नजरें रहेंगी।

UKD Announces 16 Candidates for Uttarakhand Polls 2027

उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने 31 अक्टूबर को देहरादून में प्रेसवार्ता कर पार्टी की पहली प्रत्याशी सूची जारी की। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन के लिए फाइव-लेयर सिस्टम अपनाने की बात कही है। UKD के अनुसार, प्रत्याशियों के चयन में संगठन के प्रति निष्ठा, समर्पण, जनसरोकार और उत्तराखंड के हितों के लिए किए गए संघर्ष को प्राथमिकता दी गई है। पहली सूची में गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों की 16 विधानसभा सीटों के उम्मीदवार शामिल हैं। पार्टी ने अनुभवी चेहरों के साथ युवाओं को भी मौका देने का दावा किया है।

इन 16 सीटों पर उतारे प्रत्याशी

पिथौरागढ़ – काशी सिंह ऐरी, द्वाराहाट – पुष्पेश त्रिपाठी, देवप्रयाग – पूरण सिंह कठैत, प्रतापनगर – पंकज व्यास, कर्णप्रयाग – आशीष नेगी, जागेश्वर – दिनेश कुंजवाल, राजपुर – देव चंद उत्तराखंडी, सल्ट – प्रताप सिंह, टिहरी – डीडी पंत, कपकोट – वरुण चंदोला, काशीपुर – प्रदीप चंद, नानकमत्ता – कैलाश सिंह पांगती, रामनगर – भुवन चंद्र, देहरादून कैंट – राजेंद्र सिंह नेगी, खानपुर – रितु कंडियाल जुयाल, धनोल्टी – चंदन सिंह राणा, पार्टी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में प्रत्याशियों की दूसरी सूची भी जारी की जाएगी।

14 दलों और संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिश

UKD की रणनीति सिर्फ अपने उम्मीदवार उतारने तक सीमित नहीं है। पार्टी क्षेत्रीय दलों और सामाजिक संगठनों को एक साथ लाकर उत्तराखंड में तीसरा राजनीतिक विकल्प तैयार करना चाहती है। इसी क्रम में देहरादून में आयोजित 'मंथन 2027-क्षेत्रीय एकता से उत्तराखंड का राजनीतिक विकल्प' कार्यक्रम में 14 दलों और संगठनों ने हिस्सा लिया। इनमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, स्वाभिमान मोर्चा, राष्ट्रीय रीजनल पार्टी, समानता पार्टी, हिमालय क्रांति पार्टी, विकास पार्टी और राज्य आंदोलनकारी मंच सहित कई संगठन शामिल रहे। क्षेत्रीय दलों की इस पहल का उद्देश्य राज्य के स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर साझा राजनीतिक विकल्प तैयार करना बताया जा रहा है।

2022 में AAP नहीं जीत पाई थी एक भी सीट

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 में आम आदमी पार्टी ने तीसरे राजनीतिक विकल्प के तौर पर चुनाव लड़ा था। पार्टी ने सभी 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। चुनाव में AAP को करीब 3.3 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं, भाजपा ने 47 और कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बहुजन समाज पार्टी को दो सीटें मिली थीं। पिछले चुनाव का यह परिणाम बताता है कि केवल तीसरे विकल्प के रूप में चुनाव लड़ना पर्याप्त नहीं है। विधानसभा सीटों पर प्रभाव बनाने के लिए मजबूत संगठन, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं के बीच लगातार सक्रियता भी जरूरी है।

रोजगार, पलायन और पहाड़ी मुद्दों पर UKD का भरोसा

वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत के मुताबिक, उत्तराखंड क्रांति दल की ताकत उसके पुराने कार्यकर्ताओं, राज्य आंदोलन से जुड़े चेहरों और पहाड़ी पहचान से जुड़े मुद्दों में है। हालांकि, पार्टी को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए भावनात्मक मुद्दों के साथ रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों पर भी ठोस काम और स्पष्ट एजेंडा सामने रखना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद UKD को कुछ सीटों पर सफलता मिली थी, लेकिन समय के साथ पार्टी का राजनीतिक प्रभाव कम हुआ। 2027 के चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन उसकी जमीनी सक्रियता और संगठन की मजबूती पर निर्भर करेगा।

UKD बोली- जनता अब क्षेत्रीय विकल्प चाहती है

UKD के केंद्रीय महामंत्री देव चंद्र उत्तराखंडी ने राष्ट्रीय दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस राज्य से पलायन रोकने, युवाओं को रोजगार देने और स्वास्थ्य व शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में सफल नहीं रही हैं। उनका कहना है कि उत्तराखंड की जनता अब क्षेत्रीय दलों की भूमिका को समझ रही है और UKD का लक्ष्य इस बार सत्ता में आना है।

भाजपा और कांग्रेस ने भी दी प्रतिक्रिया

भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने UKD की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी अफवाह और भ्रम की राजनीति तक सीमित रह गई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता भाजपा के साथ है। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि चुनाव में किसी भी छोटी या क्षेत्रीय पार्टी के उतरने से किस दल को कितना नुकसान होगा, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, हर विधानसभा क्षेत्र की परिस्थितियां और उम्मीदवार अलग होते हैं।

2027 में क्षेत्रीय दलों की भूमिका पर रहेगी नजर

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले UKD ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर अपनी तैयारी का संकेत दे दिया है। अब पार्टी के सामने क्षेत्रीय संगठनों को एक मंच पर लाने, जमीनी संगठन मजबूत करने और मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की चुनौती है। भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी मुकाबले में क्षेत्रीय दल किस तरह अपनी जगह बनाते हैं, यह आने वाले महीनों में उनकी रणनीति और चुनावी गतिविधियों से स्पष्ट होगा।