दिल्ली के कोचिंग सेंटर में हुई दर्दनाक घटना जैसी आपातकालीन स्थिति में दून के कुछ सेंटरों में न केवल समय पर राहत पहुंचाना कठिन होगा, बल्कि इमारत से छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने में भी समस्याएं आएंगी।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Playing With The Lives of Students in Coaching Centers in Dehradun
देहरादून: राजधानी में चल रहे कोचिंग सेंटरों में भी छात्रों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां के कोचिंग सेंटर जलभराव, आग और भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के मानकों को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। तंग गलियों में स्थित जर्जर भवनों की तीसरी-चौथी मंजिलों पर कोचिंग सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं।
Lives of Students at stake in Coaching Centers in Dehradun
प्रदेश की राजधानी देहरादून के खासकर करनपुर क्षेत्र में कोचिंग इंस्टीट्यूट संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित हैं। यहां दमकल विभाग के वाहन के लिए निकलने की जगह भी नहीं है। संकरी सड़कों पर यदि दमकल वाहन पहुंच भी जाए तो दूसरे वाहनों के क्रॉस होने की जगह नहीं रहेगी। इससे समय पर राहत-बचाव कार्य में दिक्कत होगी और रेस्क्यू टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंच पाएगी। यहाँ विभिन्न क्षेत्रों में कई कोचिंग सेंटर भवनों के बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं। बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए इन निजी संस्थानों के पास उचित इंतजाम नहीं हैं। इसके अलावा कुछ इमारतों में बरसात के कारण सीलन और काई जम गई है जो अतिरिक्त खतरा पैदा कर रही है।
सुरक्षा मानक और सजा के प्रावधान
इस साल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग संस्थानों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों के अनुसार प्रत्येक कक्षा में प्रति छात्र कम से कम एक वर्ग मीटर जगह होना आवश्यक है। कोचिंग सेंटरों को अग्नि सुरक्षा कोड का पालन करना होगा और उनके पास अग्नि और भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र भी होना चाहिए। नियमों के मुताबिक पहली बार नियमों का उल्लंघन करने पर कोचिंग इंस्टीट्यूट को 25,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा। दूसरी बार में यह जुर्माना बढ़कर एक लाख रुपये तक हो जाएगा। अगर इंस्टीट्यूट इसके बाद भी मानकों का पालन नहीं करते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
अधिकांश कोचिंग सेंटर तीसरी-चौथी मंजिल पर
देहरादून में अधिकांश इंस्टीट्यूट ग्राउंड फ्लोर पर नहीं हैं। वे दूसरी, तीसरी या चौथी मंजिल पर चल रहे हैं। कई जगहों पर इंस्टीट्यूट तक पहुंचने के लिए संकरी सीढ़ियों का उपयोग करना पड़ता है। कुछ स्थानों पर इमारतों से अलग लोहे की सीढ़ियां बनाई गई हैं। आपातकालीन स्थिति में इन सीढ़ियों से निकलना जोखिम भरा हो सकता है। कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अधिकांश जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर तो लगे हैं, लेकिन वे या तो खराब हैं या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी है। दुर्घटना के समय इनके काम करने की संभावना बेहद कम है।
कोचिंग सेंटरों के लिए बनाई जा रही नई नीति
उत्तराखंड में कोचिंग सेंटरों के लिए सरकार एक नई नीति तैयार कर रही है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशानुसार उच्च शिक्षा विभाग इस नीति का ड्राफ्ट बना रहा है। इसमें कोचिंग सेंटरों में छात्रों को दी जाने वाली सुरक्षा, सुविधाएं, शिक्षा की गुणवत्ता और शुल्क का विवरण शामिल होगा। जल्द ही इस नीति के ड्राफ्ट को कैबिनेट में पेश किया जाएगा।