हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल से छह माह में छह डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया। अब ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. शहजाद अहमद ने भी नौकरी छोड़ी। 46% डॉक्टरों की कमी से मरीजों की बढ़ी परेशानी।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Six Doctors Quit Sushila Tiwari Hospital in 6 Months
हल्द्वानी: हल्द्वानी स्थित डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में डॉक्टरों के इस्तीफों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। छह महीने के भीतर करीब छह डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। ताजा मामला ईएनटी (नाक, कान, गला) विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शहजाद अहमद का है, जिन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह अस्पताल राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के अधीन संचालित होता है और चिकित्सा शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज माना जाता है।
Six Doctors and ENT HOD Quit Sushila Tiwari Hospital in 6 Months
एसटीएच में पहले से ही 46 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी चल रही है। रोजाना कुमाऊं मंडल और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से 1800 से 2000 मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। सस्ते और बेहतर इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों को अक्सर डॉक्टरों और संसाधनों की कमी के कारण रेफर कर दिया जाता है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भेजे जाने से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। पिछले छह महीनों में कई विशेषज्ञ डॉक्टर एसटीएच से इस्तीफा दे चुके हैं:-
छह महीने में ये डॉक्टर छोड़ चुके हैं नौकरी
सर्जरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर व कार्डियक सर्जन डॉ. सुनीता
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वेताभ प्रधान
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूनम बिष्ट
डॉ. प्रीती शर्मा
हड्डी रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ईश्वर धर्मसक्तू
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण देव यादव
बेस अस्पताल से संबद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. अमित देवल
बताया जा रहा है कि दो विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एसटीएच के आसपास निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी है, जबकि अन्य डॉक्टर राज्य छोड़कर दूसरे मेडिकल कॉलेजों में चले गए हैं।
डॉक्टरों के इस्तीफे के पीछे कारण
डॉक्टरों के नौकरी छोड़ने के पीछे कई अहम कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें "समयबद्ध प्रमोशन का अभाव, स्थानांतरण का दबाव, विभागों में स्टाफ की कमी से कार्यभार अधिक और निजी प्रैक्टिस में बेहतर वेतन: शामिल हैं। इन कारणों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब ENT विभागाध्यक्ष ने भी दिया इस्तीफा
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जीएस तितियाल ने बताया कि ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. शहजाद अहमद का इस्तीफा शासन को भेज दिया गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही वे औपचारिक रूप से पद छोड़ पाएंगे। साथ ही डॉक्टरों की कमी दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।
स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी
उत्तराखंड के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक एसटीएच में डॉक्टरों की लगातार कमी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो कुमाऊं क्षेत्र के हजारों मरीजों को और अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार डॉक्टरों के पलायन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगी या मरीजों को इसी तरह कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा?