हरिद्वार: श्मशान घाट पर अनोखा दृश्य, जली चिताओं के बीच किन्नर अखाड़े की मसान होली

हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर किन्नर अखाड़े ने चिता की राख और गुलाल से पारंपरिक मसान होली खेली। महामंडलेश्वर भवानी माता और पूनम किन्नर ने इसे जीवन की नश्वरता और मोक्ष का प्रतीक बताते हुए प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।
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Haridwar Masaan Holi: Masan Holi of Kinnar Akhara at Haridwar cremation ground
Image: Masan Holi of Kinnar Akhara at Haridwar cremation ground

हरिद्वार: हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर उस समय अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब किन्नर अखाड़ा के संतों और किन्नर समाज ने पारंपरिक ‘मसान होली’ खेली। बैंड-बाजों के साथ जुलूस के रूप में पहुंचे किन्नरों ने सबसे पहले चिता की राख की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उसी राख और रंग-गुलाल से एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दी।

Masan Holi of Kinnar Akhara at Haridwar cremation ground

श्मशान घाट पर जलती और बुझी चिताओं के समीप होली खेलते किन्नरों को देखकर वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए। हालांकि, बाद में कई श्रद्धालुओं ने इसे आस्था, परंपरा और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम बताया। लोगों ने कहा कि यह जीवन और मृत्यु के सत्य को स्वीकार करने की सीख देता है।

जीवन की नश्वरता का संदेश

किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी माता ने बताया कि यह पौराणिक परंपरा है, जिसे किन्नर समाज वर्षों से निभाता आ रहा है। उन्होंने कहा कि श्मशान की राख जीवन की नश्वरता का प्रतीक है। यह हमें अहंकार त्यागकर प्रेम, भाईचारे और करुणा के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

‘श्मशान ही मोक्ष द्वार है’

महामंडलेश्वर पूनम किन्नर ने कहा कि श्मशान मोक्ष का द्वार है और हर व्यक्ति को एक दिन यहां आना है। होली के इस पावन अवसर पर उन्होंने सभी से गिले-शिकवे भुलाकर आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ जीवन बिताने का संदेश दिया।

परंपरा और आध्यात्म का संगम

मसान होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन-मृत्यु के चक्र को समझने और आत्मचिंतन का अवसर भी है। जहां एक ओर सामान्य होली उत्सव और उमंग का प्रतीक है, वहीं मसान होली जीवन की क्षणभंगुरता का एहसास कराती है।