उत्तराखंड सरकार अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए अलग नियमावली तैयार कर रही है। इसमें शिक्षकों को दुर्गम क्षेत्रों में सेवा के लिए विशेष लाभ देने का प्रावधान है, लेकिन इस नई व्यवस्था से शिक्षकों के बीच असंतोष भी बढ़ता दिख रहा है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Uttarakhand to Introduce New Policy for Atal Utkrisht Schools
देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य के अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए अलग नियमावली बनाने की तैयारी कर रही है। ये सभी विद्यालय सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध हैं और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं।
Uttarakhand to Introduce New Policy for Atal Utkrisht Schools
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, इस नई नियमावली के लागू होने के बाद इन विद्यालयों में तैनात शिक्षक तबादला नीति के दायरे में आएंगे। इससे शिक्षकों की तैनाती और सेवा शर्तों में स्पष्टता लाई जाएगी।
189 सीबीएसई संबद्ध विद्यालयों पर लागू होगी नीति
प्रदेश में कुल 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय हैं, जिन्हें वर्ष 2020-21 में उत्तराखंड बोर्ड से बदलकर सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध किया गया था। इन विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति स्क्रीनिंग परीक्षा के माध्यम से की गई थी। चयनित शिक्षकों और कर्मचारियों को इन स्कूलों में पांच साल के लिए तैनात किया गया था, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को स्थिर और बेहतर बनाया जा सके।
दुर्गम क्षेत्र में सेवा पर मिलेगा दोगुना लाभ
नई प्रस्तावित नियमावली के तहत शिक्षकों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। दुर्गम क्षेत्र में तैनात शिक्षकों की एक साल की सेवा को दो साल के बराबर माना जाएगा। सुगम क्षेत्र में तैनात शिक्षकों की सेवाओं को भी दुर्गम सेवा में जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की तैनाती को आकर्षक बनाना है, ताकि वहां शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके।
तैनाती अवधि बढ़ाने का भी प्रावधान
नई व्यवस्था के तहत, शिक्षकों की सहमति पर उनकी तैनाती पांच साल के बाद भी बढ़ाई जा सकती है। नियुक्ति अधिकारी को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह जरूरत के अनुसार शिक्षकों और कर्मचारियों की तैनाती अवधि आगे बढ़ा सके। इससे विद्यालयों में निरंतरता बनी रहेगी।
दोहरी व्यवस्था से बढ़ा विवाद
हालांकि सरकार की इस योजना का उद्देश्य शिक्षकों को प्रोत्साहित करना है, लेकिन इससे एक नई समस्या भी सामने आई है। पहले से सुगम क्षेत्र में तैनात शिक्षकों की सेवा सुगम में ही जोड़ी जा रही है। जबकि चयनित होकर आए शिक्षकों की सुगम सेवा को दुर्गम सेवा के रूप में जोड़ा जा रहा है। इस दोहरी व्यवस्था के कारण कई शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि इससे समानता का सिद्धांत प्रभावित हो रहा है।
तबादलों पर भी पड़ा असर
इस नई व्यवस्था का असर शिक्षकों के तबादलों पर भी पड़ा है। कई मामलों में देखा गया है कि अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में तैनात शिक्षकों का दुर्गम क्षेत्रों में तबादला नहीं हो पा रहा है। इससे शिक्षकों के बीच असंतोष और बढ़ गया है।
उत्तराखंड सरकार की यह नई नियमावली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि, इसमें किए गए प्रावधानों से जहां कुछ शिक्षकों को लाभ मिलेगा, वहीं दोहरी व्यवस्था और तबादला समस्याओं के कारण असंतोष भी बढ़ सकता है।